Press Trust of India | July 16, 2025 | 03:17 PM IST | 1 min read
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि काउंसलिंग कई चरणों में होगी और यदि छात्र मामले में सफल होते हैं तो वे इसमें शामिल हो सकते हैं।
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय मध्य प्रदेश के कुछ केंद्रों पर बिजली कटौती के पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2025 दोबारा कराने का निर्देश देने से इनकार करने संबंधी आदेश के खिलाफ याचिका पर बुधवार (16 जुलाई) को सुनवाई के लिए सहमत हो गया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ अगले सप्ताह इस याचिका पर सुनवाई करेगी। वकील ने इस आधार पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था कि काउंसलिंग 21 जुलाई से शुरू होनी है।
पीठ ने इस बात पर गौर किया कि काउंसलिंग कई चरणों में होगी और यदि छात्र मामले में सफल होते हैं तो वे इसमें शामिल हो सकते हैं। याचिकाकर्ता वे अभ्यर्थी हैं जिसे एमपी के कुछ केंद्रों में बिजली कटौती का सामना करना पड़ा था।
छात्रों ने हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है, जिसमें दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले, हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एनटीए को बिजली कटौती से प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा कराने को कहा था।
हालांकि, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की याचिका पर एकल न्यायाधीश के आदेश को खारिज कर दिया, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होने के प्रति आगाह किया था।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक विशेषज्ञ पैनल की उस रिपोर्ट पर गौर किया था जिसमें कहा गया था कि यद्यपि कुछ केंद्रों पर बिजली गुल थी फिर भी वहां प्राकृतिक रोशनी थी जिसमें अभ्यर्थी परीक्षा दे सकते थे।
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Santosh Kumar