Saurabh Pandey | November 2, 2026 | 03:51 PM IST | 2 mins read
शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल मींस-कम-मेरिट स्कॉलरशिप के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। इस विस्तार से छूटे विद्यार्थियों को एक और अवसर मिल जाएगा।

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए 'नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम' (NMMSS) के तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है, जिन इच्छुक और पात्र विद्यार्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं जमा किया है, वे अब 15 नवंबर, 2026 तक अपना आवेदन सबमिट कर सकते हैं।
इस विस्तार से पात्र छात्रों को 'नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल' (NSP) पर अपना आवेदन पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय पर सत्यापन करने में भी आसानी होगी। जिन छात्रों ने पहले ही अपने आवेदन जमा कर दिए हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके आवेदनों का सत्यापन संबंधित संस्थान नोडल अधिकारी (L1) द्वारा 30 नवंबर तक और जिला नोडल अधिकारी (L2) द्वारा 15 दिसंबर, 2026 तक पूरा कर लिया जाए।
नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) 1 जून, 2026 से छात्रों के आवेदन के लिए खुला है। स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले, छात्रों को पोर्टल पर अपना वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) पूरा करना होगा। आंकड़ों के मुताबिक 30 अक्टूबर 2026 तक, 90,483 नए और 1,99,531 रिन्यूअल आवेदन जमा किए जा चुके थे।
चयन परीक्षा में शामिल होने के लिए, छात्रों के पास कक्षा 7वीं में कम से कम 55 प्रतिशत अंक या समकक्ष ग्रेड होना चाहिए; एससी/एसटी छात्रों के लिए इसमें 5 प्रतिशत अंकों की छूट दी गई है। आवेदक के माता-पिता की वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
NMMSS का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के मेधावी छात्रों को सहायता प्रदान करना और उन्हें कक्षा 8 के बाद कक्षा 12 तक अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह योजना हर साल कक्षा 9वीं के पात्र छात्रों को एक लाख नई छात्रवृत्तियां प्रदान करती है, जो संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा आयोजित चयन परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं। इसके बाद, निर्धारित शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने पर, कक्षा 10 से 12 तक छात्रवृत्ति का रिन्यूअल किया जाता है।
राज्य सरकार, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और स्थानीय निकायों द्वारा संचालित स्कूलों में पढ़ने वाले पात्र छात्रों को प्रति वर्ष 12,000 रुपये मिलते हैं, जो डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं।