Three Language Policy: महाराष्ट्र के स्कूलों के लिए तीन भाषा नीति को लेकर गठित समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट
Press Trust of India | February 10, 2026 | 08:28 AM IST | 1 min read
इस समिति का गठन महाराष्ट्र में हिंदी को कथित तौर पर “थोपने” के खिलाफ कई राजनीतिक दलों की ओर से किए गए विरोध के बाद किया गया था।
मुंबई: महाराष्ट्र में स्कूलों के लिए तीन-भाषा नीति तैयार करने के वास्ते पिछले साल गठित नरेंद्र जाधव समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। अर्थशास्त्री-शिक्षाविद नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में गठित बहु-सदस्यीय समिति का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) के अनुरूप स्कूलों के लिए तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन को अंतिम रूप देना था।
इस समिति का गठन महाराष्ट्र में हिंदी को कथित तौर पर “थोपने” के खिलाफ कई राजनीतिक दलों की ओर से किए गए विरोध के बाद किया गया था। महाराष्ट्र में मराठी मुख्य भाषा है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संवाददाताओं से बातचीत में समिति की ओर से की गई सिफारिशों का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा कि इसकी रिपोर्ट राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखी जाएगी और यह निर्णय लिया जाएगा कि किन सिफारिशों को स्वीकार किया जाए या संशोधित किया जाए।
अप्रैल 2025 में एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी किया गया था, जिसमें अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों में पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए हिंदी को अनिवार्य रूप से तीसरी भाषा बनाने का प्रावधान था। हालांकि, कड़ा विरोध होने के बाद इस आदेश को रद्द कर दिया गया था और बाद में जाधव समिति का गठन किया गया था।
सरकार ने जून 2025 में एक संशोधित आदेश जारी किया था, जिसके तहत हिंदी को स्कूलों में एक वैकल्पिक भाषा बनाया गया था। बाद में नयी नीति के अनुरूप तीन-भाषा नीति के कार्यान्वयन को अंतिम रूप देने के लिए जाधव समिति का गठन किया गया था।
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