Press Trust of India | November 3, 2026 | 08:32 AM IST | 2 mins read
निर्देशों के तहत प्रत्येक स्कूल को प्रधानाचार्य या स्कूल प्रमुख की अध्यक्षता में संस्थान स्तरीय कार्यबल (आईटीएफ)/तंबाकू विरोधी समिति का गठन करना होगा या उसे मजबूत करना होगा।

नई दिल्ली: दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को नशामुक्त परिसर बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत तंबाकू विरोधी समितियों का गठन करने और विद्यार्थियों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है।
शैक्षिक एवं व्यावसायिक मार्गदर्शन और परामर्श ब्यूरो की ओर से जारी परिपत्र के अनुसार, ये निर्देश 'नशा मुक्त भारत अभियान' और 'नशा मुक्त दिल्ली अभियान' के तहत निवारक शिक्षा प्रदान करने, नशे की शुरुआती पहचान करने, परामर्श देने और जरूरत पड़ने पर नशे की चपेट में आए लोगों को संबंधित विशेषज्ञों और नशामुक्ति केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के उद्देश्य से जारी किए गए हैं।
निर्देशों के तहत प्रत्येक स्कूल को प्रधानाचार्य या स्कूल प्रमुख की अध्यक्षता में संस्थान स्तरीय कार्यबल (आईटीएफ)/तंबाकू विरोधी समिति का गठन करना होगा या उसे मजबूत करना होगा। इस समिति में एक नोडल शिक्षक या प्रहरी क्लब का प्रभारी, स्वास्थ्य एवं कल्याण दूत, स्कूल प्रबंधन समिति का एक सदस्य, विद्यार्थी प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
यह समिति मादक पदार्थों के दुरुपयोग और तंबाकू के सेवन की रोकथाम के उपायों की योजना बनाने, उन्हें लागू करने और उनकी निगरानी करने के लिए जिम्मेदार होगी। स्कूलों के प्रहरी क्लब 'नशा मुक्त दिल्ली क्लब' के रूप में काम करेंगे और पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान नियमित रूप से रोकथाम एवं जागरूकता संबंधी गतिविधियां आयोजित करेंगे।
स्कूलों को 'नवचेतना जीवन कौशल मॉड्यूल' के तहत छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए जीवन कौशल शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया है। यह मॉड्यूल हर महीने 15 से 17 तारीख के बीच उन शिक्षकों के माध्यम से संचालित किया जाएगा, जिन्हें शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान प्रशिक्षित किया गया था।
एसओपी में स्कूलों को ऐसे विद्यार्थियों को संबंधित सेवाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है, जिनके मादक पदार्थों का सेवन करने का संदेह हो या जिनकी पहचान इसका सेवन करने वाले के रूप में हुई हो।