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IIM Raipur: आईआईएम रायपुर और वॉल्वरहैम्प्टन विश्वविद्यालय ने शैक्षिक सहयोग मजबूत करने के लिए साइन किया एमओयू

Saurabh Pandey | October 4, 2024 | 03:33 PM IST | 1 min read

आईआईएम रायपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन, यूके के बीच शैक्षिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एमओयू साइन हुआ है। इससे वैश्विक आदान-प्रदान के अवसरों को मजबूती मिलेगी।

यह एमओयू न केवल आईआईएम रायपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करेगा।
यह एमओयू न केवल आईआईएम रायपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करेगा।

नई दिल्ली : आईआईएम रायपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन ने शैक्षिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक एमओयू साइन किया है। यह समझौता शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने, अनुसंधान पहलों को प्रोत्साहित करने और दोनों संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

इस एमओयू पर आईआईएम रायपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर राम कुमार काकानी और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन के वाइस-चांसलर प्रोफेसर इब्राहीम आदिया ने हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने का एक प्रमुख मील का पत्थर है, क्योंकि दोनों संस्थान विशेषज्ञता, संसाधनों और अनुसंधान क्षमताओं का आदान-प्रदान करने लिए काम करेंगे। जिससे उनके छात्रों और शिक्षकों के लिए शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाया जा सके।

इस अवसर पर बोलते हुए, प्रोफेसर राम कुमार काकानी ने आज के शैक्षणिक परिदृश्य में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा कि यह एमओयू न केवल आईआईएम रायपुर और यूनिवर्सिटी ऑफ वूल्वरहैम्प्टन के बीच शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि हमारे छात्रों और शिक्षकों के लिए ज्ञान आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और क्रॉस-कल्चरल लर्निंग अनुभवों के नए मार्ग खोलेगा।

इन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

इस समझौते का ध्यान कई प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जिनमें संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, ड्यूल डिग्री प्रोग्राम, फैकल्टी विकास कार्यक्रम, छात्र आदान-प्रदान पहल और नवीन शैक्षिक कार्यक्रमों का विकास शामिल है।

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एमओयू में संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएं और सम्मेलन आयोजित करने का प्रावधान भी शामिल है, जिससे ज्ञान साझा करने और सहयोग को प्रोत्साहन मिले। इस समझौते से दोनों संस्थानों की वैश्विक दृश्यता और पहुंच को बढ़ाने की उम्मीद है, जिससे विभिन्न शैक्षणिक और अनुसंधान क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग के रास्ते खुलेंगे।

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