IIM Kashipur: आईआईएम काशीपुर के नए बैच में 42% छात्राएं, पिछले सत्र की तुलना में 7% की हुई बढ़ोतरी
Abhay Pratap Singh | July 3, 2024 | 06:02 PM IST | 2 mins read
एमबीए और एमबीए एनालिटिक्स के अलावा डॉक्टरेट कार्यक्रम में 15 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया, जिनमें से चार महिलाएं हैं।
नई दिल्ली: भारतीय प्रबंधन संस्थान, काशीपुर (IIM Kashipur) के नए बैच 2024-26 में 42 प्रतिशत छात्राओं ने प्रवेश लिया है, जो पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में 7% अधिक है। आईआईएम काशीपुर में पिछले वर्ष लगभग 35 प्रतिशत छात्राओं को प्रवेश दिया गया था।
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संस्थान ने मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन - एनालिटिक्स (MBA-A) में नामांकित कुल 471 छात्रों में से 196 छात्राओं को प्रवेश दिया है। एमबीए और एमबीए-ए के अलावा डॉक्टरेट कार्यक्रम में 15 उम्मीदवारों ने दाखिला लिया, जिनमें से चार महिलाएं हैं।
आईआईएम काशीपुर के एमबीए, एमबीए (एनालिटिक्स) और डॉक्टरेट (पीएचडी) कार्यक्रमों के नए बैच (वर्ष 2024-26) का उद्घाटन कार्यक्रम 27 से 30 जून 2024 के बीच संस्थान द्वारा आयोजित एक अभिविन्यास सत्र के साथ शुरू हुआ। कार्यक्रम में उत्तराखंड सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए।
शैक्षणिक विविधता के मामले में नए बैच में 37 प्रतिशत छात्र इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से और 33 प्रतिशत कॉमर्स से हैं। 12% से अधिक छात्र विज्ञान से, 6 प्रतिशत कला से और शेष 11 प्रतिशत छात्र चिकित्सा, संचार और अन्य पृष्ठभूमि से हैं। जबकि बैच का कुल कार्य अनुभव 13 महीने का है।
संस्थान ने जारी बयान में कहा कि जहां तक भौगोलिक विविधता का सवाल है, नए बैच में 28 राज्यों का प्रतिनिधित्व है, जिनमें सबसे अधिक 63-63 छात्र महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से हैं। इस सत्र में एमबीए-एनालिटिक्स में 75 प्रतिशत छात्राएं हैं, जो पिछले वर्ष की 69% महिला अभ्यर्थियों की संख्या से अधिक है।
लैंगिक विविधता पर एडमिशन अध्यक्ष प्रो. अभ्रदीप मैती ने कहा, “आईआईएम काशीपुर में पिछले कुछ वर्षों में महिला छात्रों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है। साल 2019 में 11% महिला छात्रों की संख्या थी, जो नए बैच 2024-26 में बढ़कर 42% तक पहुंच गई है।”
आईआईएम काशीपुर के प्रभारी निदेशक प्रो. सोमनाथ चक्रवर्ती ने कहा, “हमारे छात्र हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं। पहली पीढ़ी के आईआईएम को इस स्तर तक पहुंचने में दशकों लग गए, जबकि आईआईएम काशीपुर ने 13 वर्षों में यह मुकाम हासिल किया है।”
प्रो. सोमनाथ ने आगे कहा, लैंगिक और भौगोलिक विविधता, रैंकिंग के साथ ही विदेशी संस्थानों के साथ सहयोग जैसे सभी विषयों में आईआईएम काशीपुर देश के शीर्ष 10 आईआईएम में जगह पाने के लिए प्रयासरत है। छात्रों के लिए किए गए हमारे प्रयास रंग ला रहे हैं, न केवल महिला प्रतिनिधित्व बल्कि हर शैक्षणिक वर्ष में आवेदनों की संख्या भी बढ़ रही है।
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