Press Trust of India | November 2, 2026 | 09:29 AM IST | 2 mins read
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम पर उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्देशों के अनुरूप नियम बनाए गए हैं।

नई दिल्ली: गुजरात सरकार ने छात्रों में तनाव दूर करने और आत्महत्याओं को रोकने के प्रयासों के तहत, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता व्यवस्था को अनिवार्य बनाने वाले नए नियम लागू किए हैं। इनमें समर्पित ‘वेलनेस टीम’, पीयर-सपोर्ट सिस्टम (साथियों द्वारा सहायता प्रणाली) और योग्य परामर्शदाता (Counsellor) शामिल हैं।
‘वेलनेस टीम’ का मतलब ऐसी टीम या समूह से है, जो किसी संस्थान के सदस्यों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य की देखभाल और उसे बेहतर बनाने के लिए काम करती है। राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति में रविवार को कहा गया कि गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा विनियम 1974 के तहत लागू किए गए ये प्रावधान गुजरात माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (जीएसएचएसईबी) से संबद्ध स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक लागू होंगे।
राज्य सरकार ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतना ही महत्व मिले, जितना उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को दिया जाता है, खासकर परीक्षा के दबाव, अंकों के लिए प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग, परिवार की अपेक्षाओं और भविष्य को लेकर चिंता के मद्देनजर।
छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम पर उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और निर्देशों के अनुरूप नियम बनाए गए हैं। राज्य ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा विकसित ‘उम्मीद’ (समझना, प्रेरित करना, प्रबंधन करना, सहानुभूति रखना, सशक्त बनाना और विकास करना) दिशानिर्देशों को भी एक संदर्भ रूपरेखा के रूप में अपनाया है।
विज्ञप्ति में कहा गया, “नए नियमों के तहत कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई कराने वाले प्रत्येक स्कूल को हर शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में एक स्कूल वेलनेस टीम (एसडब्ल्यूटी) का गठन करना होगा। टीम के कामकाज की सालाना समीक्षा की जाएगी। स्कूल के प्रधानाचार्य टीम के प्रमुख होंगे, जबकि एक परामर्शदाता या नामित शिक्षक इसके समन्वयक के रूप में कार्य करेंगे।”
इसमें आगे कहा गया कि टीम में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक वर्गों से एक-एक शिक्षक, स्कूल प्रबंधन समिति का एक प्रतिनिधि, एक गैर-शिक्षण कर्मचारी और दोनों वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो छात्र सहपाठी नेता, जिन्हें 'मनो-मित्र' कहा जाता है, भी शामिल होंगे।