Press Trust of India | November 2, 2026 | 07:36 AM IST | 2 mins read
मैनपुरी जिले में 1 अभ्यर्थी राकेश कुमार के पास ब्लूटूथ उपकरण मिलने पर उसके खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से तीन दिन तक आयोजित प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 में 68 प्रतिशत से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। बयान के अनुसार, परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के आरोप में दो अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि 67 अन्य अभ्यर्थियों को संदिग्ध चिह्नित किया गया।
बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और नकल मुक्त बनाने के प्रयासों का असर पीईटी 2026 के आयोजन में भी दिखाई दिया। इसमें कहा गया कि परीक्षाओं में अनियमितताओं को कतई बर्दाश्त नहीं करने की सरकार की नीति, तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता के बीच 25 और 30 अक्टूबर तथा 1 नवंबर को प्रदेश के 60 जिलों के 1,372 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में परीक्षा आयोजित की गई।
परीक्षा के लिए कुल 35,41,297 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 24,36,253 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इस प्रकार कुल 68.79 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। बयान के मुताबिक, परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल के प्रयासों पर आयोग और प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की।
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रविवार को मैनपुरी जिले में 1 अभ्यर्थी राकेश कुमार के पास ब्लूटूथ उपकरण मिलने पर उसके खिलाफ संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इसमें बताया कि तीनों दिन की परीक्षा के दौरान कुल 2 अभ्यर्थियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके अलावा, कृत्रिम मेधा (AI) आधारित मिलान प्रणाली की मदद से 67 अभ्यर्थियों को संदिग्ध चिह्नित किया गया।
जांच के बाद उनके खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बयान के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर लगे 31,602 सीसीटीवी कैमरों के जरिए परीक्षा की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। निगरानी के लिए आयोग के कार्यालय में एक केंद्रीय कमान एवं नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया था।
इसके अलावा, परीक्षा वाले सभी जिलों में जिला स्तरीय नियंत्रण कक्षों और सीसीटीवी कैमरों से सीधी निगरानी की व्यवस्था की गई थी। परीक्षा के सुचारू संचालन और निगरानी के लिए 2,744 सेक्टर एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा लगभग 93,738 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया था। परीक्षा ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की गई थी।