Saurabh Pandey | August 4, 2026 | 05:40 PM IST | 3 mins read
सिस्को और आईआईटी दिल्ली ने एआई और साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में रिसर्च, वर्कफोर्स डेवलपमेंट और इकोसिस्टम सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

नई दिल्ली : सिस्को और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) ने एआई और साइबर सिक्योरिटी पर 'सिस्को टेक्नोलॉजी हब' शुरू करने की घोषणा की। यह देश में रिसर्च को आगे बढ़ाने, स्किल्स विकसित करने और एआई व साइबर सिक्योरिटी इकोसिस्टम को मजबूत करने की एक मिली-जुली पहल है।
यह पार्टनरशिप इनोवेशन को बढ़ावा देने, ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम करने और अत्यधिक कुशल डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करने में मदद करने के लिए सिस्को की टेक्नोलॉजी विशेषज्ञता और आईआईटी दिल्ली की एकेडमिक लीडरशिप को एक साथ लाती है।
यह हब इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स और सरकारी कर्मचारियों के लिए खास कोर्स उपलब्ध कराने के मकसद से सिस्को नेटवर्किंग एकेडमी (NetAcad) के साथ मिलकर तैयार किए गए 'कंटीन्यूइंग एजुकेशन प्रोग्राम' (CEP) पेश करेगा। यह हब सरकारी संस्थाओं और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) के लिए उभरती हुई टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी से जुड़े खतरों और बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित छोटे ट्रेनिंग प्रोग्राम भी तैयार करेगा।
यह हब इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार के बीच बातचीत और सहयोग के लिए एक मंच का काम करेगा। इसमें सिक्योरिटी वर्कशॉप, रिसर्च फ़ोरम और सालाना 'सिक्योरिटी एंड ट्रस्ट समिट' जैसी पहल शामिल होंगी। इन आयोजनों में राष्ट्रीय विशेषज्ञ नई टेक्नोलॉजी के ट्रेंड्स और साइबर-सिक्योरिटी की चुनौतियों पर चर्चा करेंगे, साथ ही अत्याधुनिक रिसर्च और सिक्योरिटी से जुड़े डेमो भी दिखाए जाएंगे।
इस टेक्नोलॉजी हब का मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एआई और साइबर सिक्योरिटी रिसर्च, इनोवेशन और टैलेंट डेवलपमेंट के लिए एक प्रमुख केंद्र बनना है। भारत की डिजिटल बदलाव की प्राथमिकताओं के साथ तालमेल बिठाकर और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित करके, यह तीन साल का सहयोग सरकारी स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर डिजिटल फ्रेमवर्क और सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा। साथ ही, यह एक अधिक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम के लिए असल दुनिया की चुनौतियों के समाधान भी तैयार करेगा। इस मौके पर आईआईटी दिल्ली के कॉर्पोरेट रिलेशंस के डीन, प्रो. जयंत जैन ने कहा कि यह सहयोग इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान और मिलकर समाधान बनाने की संस्थान की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।
इस पहल के माध्यम से, हमारा मकसद इनोवेशन को बढ़ावा देना, भविष्य के लिए तैयार टैलेंट विकसित करना और भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने में योगदान देना है। एमओयू साइन करने के समारोह में आईआईटी दिल्ली के डीन (R&D) प्रो. अश्विनी के. अग्रवाल भी मौजूद थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह सहयोग एआई और साइबर सिक्योरिटी में आईआईटी दिल्ली की रिसर्च को मजबूत करेगा और भारत के डिजिटल भविष्य को सपोर्ट करेगा।
इस सहयोग पर बात करते हुए सिस्को इंडिया और साउथ एशिया की प्रेसिडेंट डेजी चिट्टिलापिल्ली ने कहा कि पूरे भारत में इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए एकेडेमिया, इंडस्ट्री और सरकार के बीच मजबूत सहयोग बहुत जरूरी है। आईआईटी दिल्ली के साथ हमारी पार्टनरशिप रिसर्च और टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञता को एक साथ लाती है ताकि अत्याधुनिक एआई रिसर्च को आगे बढ़ाया जा सके, एआई और साइबर सिक्योरिटी में असल दुनिया की चुनौतियों के लिए सुरक्षित समाधान विकसित किए जा सकें और साथ ही अगली पीढ़ी के टैलेंट की एक ऐसी पाइपलाइन तैयार की जा सके जो भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देगी। यह हब रिसर्च, टैलेंट और इकोसिस्टम एंगेजमेंट पर फोकस करेगा।
सबसे चिंताजनक स्थिति बिहार में है, जहां प्राइमरी लेवल पर शिक्षकों के 2.08 लाख से अधिक पद खाली हैं। इसके अलावा, सेकेंडरी लेवल पर 36,035 और सीनियर सेकेंडरी लेवल पर 33,035 पद खाली हैं, जिससे राज्य में शिक्षकों के खाली पदों की कुल संख्या लगभग 2.77 लाख हो जाती है।
Santosh Kumar