Press Trust of India | December 26, 2024 | 05:05 PM IST | 1 min read
सीसीपीए ने पाया कि संस्थानों ने छिपाया कि उनके अधिकांश सफल उम्मीदवारों ने केवल साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रमों के लिए नामांकन कराया था।
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नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने सिविल सेवा परीक्षाओं में अपनी सफलता दर के बारे में भ्रामक विज्ञापन देने के लिए 3 कोचिंग संस्थानों पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सरकार ने गुरुवार (26 दिसंबर) को यह जानकारी दी।
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आधिकारिक बयान के मुताबिक, यूपीएससी 2022 और 2023 के परिणामों को लेकर भ्रामक दावे करने पर वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट और स्टडीआईक्यू आईएएस पर 7-7 लाख रुपये और एज आईएएस पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
सीसीपीए ने पाया कि संस्थानों ने यह बात छिपाई कि अधिकांश सफल अभ्यर्थियों ने केवल साक्षात्कार मार्गदर्शन कार्यक्रमों में पंजीकरण कराया था, जिससे उनके अन्य पाठ्यक्रमों की प्रभावशीलता के बारे में भ्रामक धारणा बनी।
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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट ने 2022 की परीक्षा में “933 में से 617 चयन” का दावा किया है, जबकि स्टडीआईक्यू आईएएस ने 2023 में “120+ चयन” का विज्ञापन दिया था।
दोनों संस्थानों में सफल उम्मीदवारों में से अधिकांश ने केवल साक्षात्कार की तैयारी के लिए ही पाठ्यक्रम में पंजीकरण कराया था। उपभोक्ता संरक्षण निकाय ने भ्रामक विज्ञापनों को लेकर विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 45 नोटिस जारी किए हैं।
सीसीपीए ने अब तक 22 संस्थानों से 71.6 लाख रुपये का जुर्माना वसूला है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत जरूरी जानकारी छिपाना भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, जिसके लिए जुर्माने का प्रावधान है।