CBSE: सीबीएसई भारतीय गणित परंपरा पर 150-175 पन्नों का मोनोग्राफ विकसित करेगा
Saurabh Pandey | August 11, 2025 | 10:39 PM IST | 1 min read
बोर्ड अधिकारी ने कहा कि यह मोनोग्राफ एक खुली प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए शैक्षणिक भागीदार या एजेंसी के माध्यम से विकसित किया जाएगा और बाद में इसे स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों के लिए डिजिटल और प्रिंट दोनों रूपों में उपलब्ध कराया जाएगा।
नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) गणित के क्षेत्र में भारत के योगदान का डॉक्यूमेंटेशन करने के लिए एक व्यापक मोनोग्राफ "भारतीय गणित परंपरा" विकसित करेगा। सीबीएसई ने बताया कि 150-175 पन्नों का यह "प्रामाणिक मोनोग्राफ" प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत की प्रमुख गणितीय खोजों और इनोवेशंस का डॉक्यूमेंटेशन करेगा। बोर्ड की हालिया शासी निकाय बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पाठ्यक्रम में भारत की ज्ञान परंपराओं के एकीकरण और सांस्कृतिक रूप से निहित एवं विश्व स्तर पर प्रासंगिक शिक्षण सामग्री के विकास पर जोर देती है। सीबीएसई गणित के क्षेत्र में भारत के योगदान को उजागर करने वाला एक प्रामाणिक मोनोग्राफ विकसित करने का प्रस्ताव रखता है।
बोर्ड अधिकारी ने कहा कि यह मोनोग्राफ एक खुली प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए शैक्षणिक भागीदार या एजेंसी के माध्यम से विकसित किया जाएगा और बाद में इसे स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों के लिए डिजिटल और प्रिंट दोनों रूपों में उपलब्ध कराया जाएगा।
मोनोग्राफ में क्या-क्या होगा?
बोर्ड अधिकारी ने कहा कि दस्तावेज में सामग्री की प्रामाणिकता के लिए अनुवादित मूल संस्कृत श्लोक और स्रोत संदर्भ भी शामिल होंगे। मोनोग्राफ में प्रमुख हस्तियों, विचारधाराओं और सुल्ब सूत्र, आर्यभटीय, ब्रह्मस्फुटसिद्धांत, लीलावती जैसे ग्रंथों और केरल स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स के योगदान का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
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इसमें सामग्री की प्रामाणिकता के लिए अनुवादित मूल संस्कृत श्लोक और स्रोत संदर्भ भी शामिल होंगे, इसके अलावा खगोल विज्ञान, वास्तुकला, वाणिज्य और शिक्षा में भारतीय गणित के अनुप्रयोगों को शामिल किया जाएगा और शिक्षार्थियों की सहभागिता के लिए जीवनी संबंधी नोट्स, समयरेखा और सचित्र उदाहरण भी शामिल होंगे।
बोर्ड अधिकारी ने कहा कि सीबीएसई एक विशेषज्ञ सलाहकार समिति बनाएगा, जिसमें गणित के इतिहासकार, संस्कृत विद्वान, गणित शिक्षक और शिक्षाविद शामिल होंगे जो संरचना और सामग्री का मार्गदर्शन करेंगे।
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