Press Trust of India | June 27, 2026 | 08:31 AM IST | 2 mins read
सीबीएसई के अधिकारी ने कहा, ''नयी भाषा नीति के तहत कम से कम 2 भारतीय भाषाओं की पढ़ाई को आगे छठी कक्षा से लागू किया जाएगा और यह उन छात्रों पर लागू नहीं होगा, जो पहले से ही 7वीं से लेकर 9वीं कक्षा तक में पढ़ रहे हैं।''

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 7वीं से 9वीं कक्षा तक के उन लाखों छात्रों को राहत मिली है, जिन्होंने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है। उन्हें 10वीं कक्षा तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। यह घटनाक्रम सीबीएसई की उस घोषणा के एक महीने से अधिक समय बाद हुआ है, जिसमें कहा गया था कि 1 जुलाई से 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए 3 भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है, जिनमें कम से कम 2 भारतीय भाषाएं शामिल होंगी। कई छात्रों और अभिभावकों ने सीबीएसई के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था।
सीबीएसई के अधिकारी ने कहा, ''नयी भाषा नीति के तहत कम से कम 2 भारतीय भाषाओं की पढ़ाई को आगे छठी कक्षा से लागू किया जाएगा और यह उन छात्रों पर लागू नहीं होगा, जो पहले से ही 7वीं से लेकर 9वीं कक्षा तक में पढ़ रहे हैं।''
अधिकारी ने कहा, ''जल्द अधिसूचना जारी की जाएगी।'' बोर्ड ने मई में कहा था कि जब तक विशेष आर3 पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, 9वीं कक्षा के छात्र चुनी हुई भाषा की छठी कक्षा की आर3 पाठ्यपुस्तकों का इस्तेमाल करेंगे।
आर3 पुस्तक छात्रों के लिए जारी की गई तीसरी भाषा की अध्ययन सामग्री को संदर्भित करती है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जो छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें कक्षा 10 तक मौजूदा कॉम्बिनेशन को जारी रखने की अनुमति है।
15 मई को जारी परिपत्र के अनुसार, जो छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहते हैं, वे ऐसा केवल 2 भारतीय भाषाओं की पढ़ाई करने के बाद तीसरी भाषा के तौर पर या फिर अतिरिक्त चौथी भाषा के तौर पर ही कर सकते हैं।
अप्रैल में, सीबीएसई ने छठी कक्षा से तीन-भाषा फॉर्मूले को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और 2026-27 अकादमिक सत्र से नौवीं कक्षा के लिए गणित और विज्ञान में दो-स्तर वाली प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।