Press Trust of India | August 17, 2026 | 05:41 PM IST | 2 mins read
बारिश के बावजूद कुछ छात्राएं सिर पर तौलिया लपेटकर प्रदर्शन स्थल पर बैठी रहीं, जबकि कई अन्य ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और एक व्यस्त चौराहे पर रास्ता जाम कर दिया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक स्कूल में शिक्षकों की कमी और कक्षाएं ठीक से नहीं चलने का आरोप लगाते हुए सोमवार को भारी बारिश के बीच एक सरकारी आवासीय स्कूल की छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया। जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की छात्राओं का यह विरोध प्रदर्शन दोबारा हुआ है। 3 दिन पहले शुक्रवार को इसी स्कूल की छात्राओं ने अपनी शिकायतों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
सोमवार सुबह करीब 9 बजे कई छात्राएं स्कूल से बाहर निकलीं और डुबग्गा-कानपुर बाईपास तथा बालागंज चौराहों पर प्रदर्शन किया। अपने स्कूल में शिक्षण कार्यों से जुड़े मुद्दों से संबंधित पोस्टर और बैनर लिए छात्र-छात्राओं ने नारे लगाए।
बारिश के बावजूद कुछ छात्राएं सिर पर तौलिया लपेटकर प्रदर्शन स्थल पर बैठी रहीं, जबकि कई अन्य ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर मानव श्रृंखला बनाई और एक व्यस्त चौराहे पर रास्ता जाम कर दिया।
'जेन अल्फा' ने मुख्य रूप से शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि कक्षाएं ठीक से संचालित नहीं की जा रही हैं। सूचना मिलने पर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनसे प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाया।
अनामिका नाम की एक छात्रा ने बताया कि स्कूल में सुबह 8 बजे से शाम तक कक्षाएं संचालित की जाती हैं और असेंबली सत्र में ही लगभग 2 घंटे लग जाते हैं, इसलिए छात्रों के पास अन्य गतिविधियों के लिए बहुत कम समय बचता है।
उसने आरोप लगाया कि स्कूल में विज्ञान के छात्रों की खासी संख्या होने के बावजूद केवल रसायन विज्ञान विषय के शिक्षक ही उपलब्ध हैं, जबकि जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान विषय पढ़ाने के लिये कोई भी शिक्षक नहीं है।
छात्रा अनामिका ने आगे कहा, ''बोर्ड परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रों को ऑनलाइन कक्षा में शामिल होने में भी दिक्कतें आ रही हैं।''
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने वार्डन के खिलाफ कार्रवाई और अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की भी मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे फिर से विरोध प्रदर्शन करेंगी।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने कहा कि अधिकारियों ने छात्राओं से बात की है और बातचीत से उनकी शिकायतों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में स्टूडेंट्स की समस्याओं पर चर्चा की गई।
निर्देशों के तहत, प्राचार्य/संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, केवल ये शासकीय अधिकारी अपवाद होंगे, जो अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विधिवत अधिकृत हों।
Santosh Kumar