Press Trust of India | August 17, 2026 | 05:41 PM IST | 3 mins read
संगठन ने एनटीए से यह बताने को कहा कि ये गलतियां कैसे हुईं और प्रश्नपत्र तैयार करने तथा समीक्षा प्रक्रिया के दौरान गलतियों को क्यों नहीं पकड़ा गया।

नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने सोमवार को कहा कि यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्रों में गंभीर तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और भाषा संबंधी त्रुटियों के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं किया जा सकता। अभाविप ने एक बयान में यूजीसी-नेट 2026 के अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों की दोबारा परीक्षा कराने को लेकर गंभीर चिंता जताई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध छात्र संगठन ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की गंभीर त्रुटियां पूरी प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
संगठन ने एनटीए से यह बताने को कहा कि ये गलतियां कैसे हुईं और प्रश्नपत्र तैयार करने तथा समीक्षा प्रक्रिया के दौरान गलतियों को क्यों नहीं पकड़ा गया। अभाविप के राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “यूजीसी-नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में गंभीर गलतियां बेहद चिंताजनक हैं। एनटीए की लापरवाही की कीमत छात्रों को नहीं चुकानी चाहिए। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि एनटीए को दोबारा परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए उचित परीक्षा केंद्र आवंटन और पर्याप्त यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि उन्हें अतिरिक्त आर्थिक या मानसिक परेशानी का सामना न करना पड़े। सोलंकी ने कहा कि एजेंसी को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और परीक्षा प्रक्रिया के हर चरण के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर छात्रों की चिंताओं का समाधान नहीं किया गया और जरूरी सुधार लागू नहीं किए गए तो अभाविप देशभर के छात्रों के साथ इन मुद्दों को उठाएगी।
सोलंकी ने कहा कि अभाविप छात्रों की मांगों के प्रति प्रतिबद्ध है और जब तक विश्वसनीय, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित नहीं होती, तब तक अपने प्रयास जारी रखेगी। संगठन ने कहा कि बार-बार परीक्षा होने का खामियाजा छात्रों को समय, धन और उनकी शैक्षणिक योजनाओं के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। संगठन ने कहा कि केवल दोबारा परीक्षा कराना समाधान नहीं है। एनटीए को प्रश्नपत्र तैयार करने, विशेषज्ञों से समीक्षा, अनुवाद, प्रूफरीडिंग और अंतिम गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया मजबूत करनी चाहिए तथा लापरवाही के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए।
संगठन ने बताया कि वह परीक्षा सुधारों को लेकर छात्रों, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव जुटा रहा है। अभाविप ने कहा, “चंडीगढ़, दिल्ली और पटना में बैठकें हो चुकी हैं और इन सुझावों को परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के समक्ष रखा जाएगा। अभाविप छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है और जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, उनकी आवाज उठाती रहेगी।”
एनटीए ने जून में आयोजित यूजीसी-नेट परीक्षा के तीन विषयों अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के लिए दोबारा परीक्षा कराने की रविवार को घोषणा की थी। इन प्रश्नपत्रों में कई त्रुटियों की शिकायतों के बाद यह फैसला लिया गया। अंग्रेजी और वाणिज्य की दोबारा परीक्षा 9 सितंबर को, जबकि समाजशास्त्र की परीक्षा अगले दिन होगी। एनटीए ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ), सहायक प्रोफेसर पद के लिए पात्रता और पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए यूजीसी-नेट परीक्षा 22 से 30 जून के बीच 87 विषयों में आयोजित की थी।