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UP Sanskrit Board: फर्जी दस्तावेजों से बने 12वीं के टॉपर का रिजल्ट रद्द, इनामी राशि और मेडल वापस लेने का आदेश

Saurabh Pandey | August 21, 2026 | 02:57 PM IST | 2 mins read

यूपी संस्कृत बोर्ड की 12वीं परीक्षा में 89.36% अंकों के साथ राज्य में पहला स्थान हासिल करने वाले छात्र रजनीश यादव का परिणाम फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद रद्द कर दिया गया है।

रजनीश यादव को मिले 1 लाख रुपये के नकद इनाम सहित मेडल और प्रशस्ति पत्र वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। (आधिकारिक वेबसाइट)
रजनीश यादव को मिले 1 लाख रुपये के नकद इनाम सहित मेडल और प्रशस्ति पत्र वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। (आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित 'उत्तर मध्यमा' परीक्षा (12वीं) में टॉप करने वाले रजनीश यादव के खिलाफ उनके डॉक्यूमेंट्स में कथित गड़बड़ियों को लेकर विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है। उनके 'पूर्व मध्यमा' से लेकर 'उत्तर मध्यमा' तक के सभी एजुकेशनल रिकॉर्ड्स को रद्द करने का आदेश दिया गया है। अधिकारियों ने मेधावी छात्र सम्मान कार्यक्रम के तहत उन्हें दिए गए 1 लाख रुपये के नकद इनाम, टैबलेट, मेडल और सर्टिफिकेट को भी वापस लेने का आदेश दिया है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने 24 अप्रैल, 2026 को परीक्षा के नतीजे घोषित किए थे। प्रतापगढ़ के यदुनाथपुर सैफबाद स्थित श्री राम टहल संस्कृत हायर सेकंडरी स्कूल के छात्र रजनीश यादव ने 'उत्तर मध्यमा' परीक्षा में 89.36 प्रतिशत अंक हासिल किए और राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया।

पड़ोसी की शिकायत पर कार्रवाई

यह मामला तब सामने आया जब पड़ोस के एक परिवार के सदस्य जगत यादव ने छात्र के नाम और जन्म तिथि में अलग-अलग डॉक्यूमेंट्स में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, उनके पुराने एजुकेशनल रिकॉर्ड्स, राशन कार्ड और वोटर लिस्ट में नाम 'अजय कुमार' था और जन्म तिथि 13 मई, 1998 दर्ज थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बाद में उनके आधार कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट्स में उनका नाम बदलकर 'रजनीश यादव' और जन्म तिथि 1 जुलाई, 2010 कर दी गई।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल संस्कृत स्कूल में एडमिशन लेने और 2026 की संस्कृत बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए किया गया था। धोखाधड़ी, जालसाजी और नकली दस्तावेज बनाने के आरोपों के सिलसिले में आसपुर देवसरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद, प्रतापगढ़ के जिला स्कूल निरीक्षक ओंकार राणा ने विभागीय जांच के लिए एक टीम बनाई।

अजय कुमार नाम से हाई स्कूल में हुआ था फेल

यह जांच रसूलपुर के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल और सराय आनंददेव के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपलों ने मिलकर की। यदुनाथपुर सैफबाद के श्री राम टहल संस्कृत हायर सेकेंडरी स्कूल से मिले रिकॉर्ड की भी जांच की गई। जांच में यह भी पता चला कि छात्र ने कथित तौर पर जौनपुर के एक स्कूल से अजय कुमार नाम से हाई स्कूल की परीक्षा दी थी और फेल हो गया था। आरोप है कि संस्कृत स्कूल में एडमिशन लेने से पहले उसके दस्तावेजों में बदलाव किए गए थे।

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जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई

जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेजी सबूतों के आधार पर जारी इस आदेश में कहा गया है कि रजनीश यादव ने कथित तौर पर नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा तक की परीक्षाएं पास की थीं। प्रतापगढ़ के जिला स्कूल निरीक्षक ओंकार राणा ने कहा कि यह कार्रवाई विभागीय जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजी सबूतों के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि 10 अगस्त के आदेश में यादव के शैक्षणिक रिकॉर्ड को रद्द करने और 1 लाख रुपये का इनाम, टैबलेट, मेडल और सर्टिफिकेट वापस लेने का निर्देश दिया गया है।

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