UP Paper Leak: योगी सरकार की नई परीक्षा नीति, पेपर लीक रोकने के लिए उठाए जाएंगे सख्त कदम
Santosh Kumar | June 21, 2024 | 02:46 PM IST | 3 mins read
प्रश्नपत्र ले जाने वाले बक्सों में टैंपर प्रूफ मल्टीलेयर पैकेजिंगग होगी। प्रश्नपत्र सेट करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी का परीक्षा नियंत्रक द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश समेत देशभर में परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों के बाद यूपी सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नई परीक्षा नीति जारी की है। हाल ही में यूपी पुलिस भर्ती, आरओ-एआरओ पेपर लीक के अलावा राज्य में टीजीटी का पेपर भी लीक हुआ है। इसके साथ ही नीट पीजी और यूजीसी नेट परीक्षा पेपर लीक का मामला भी जांच एजेंसियों के घेरे में है। ऐसे में सरकार ने इसे रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सीएम के निर्देशानुसार परीक्षा केंद्रों को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और जिला कोषागार से 10 किलोमीटर के अंदर रखना अनिवार्य किया गया है। साथ ही परीक्षा केंद्र को परीक्षा आयोजित करने का 3 साल का अनुभव होना भी अनिवार्य किया है।
परीक्षा केंद्र शहर की आबादी के भीतर होना अनिवार्य है। साथ ही वहां तक पहुंचने के लिए परिवहन सुविधा सहित सड़क का होना भी जरूरी है। परीक्षा केंद्र के भवन में बाउंड्रीवाल, पेयजल, शौचालय के साथ ही बिजली और जेनरेटर की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
प्रश्नपत्र के हर पेज पर यूनिक बार कोड
अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी ने शासनादेश जारी कर सभी आयोगों और बोर्डों को भेज दिया है। एक पाली में अधिकतम 4 लाख अभ्यर्थियों को अनुमति दी जाएगी। पीसीएस परीक्षा एक पाली में होगी। प्रश्नपत्र के हर पेज पर यूनिक बार कोड, क्यूआर कोड, यूनिक सीरियल नंबर जैसे गोपनीय सुरक्षा चिह्न लगाने होंगे।
प्रश्नपत्र ले जाने वाले बक्सों में टैंपर प्रूफ मल्टीलेयर पैकेजिंगग होगी। प्रश्नपत्र सेट करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी का परीक्षा नियंत्रक द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा।
UP Paper Leak: 50 फीसदी स्टाफ दूसरे संस्थानों से
परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में होना अनिवार्य किया गया है। डीएम की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर परीक्षा केंद्रों का चयन किया जाएगा। श्रेणी ए में राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय डिग्री कॉलेज, राज्य व केंद्रीय विश्वविद्यालय, पॉलीटेक्निक, इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
जबकि श्रेणी बी में उसी स्तर के प्रतिष्ठित व सुविधायुक्त सहायता प्राप्त विद्यालय व महाविद्यालयों को केंद्र बनाया जाएगा। ब्लैक लिस्ट में दर्ज विवादित विद्यालय व महाविद्यालयों को किसी भी दशा में परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
परीक्षा केंद्रों पर नियुक्त पर्यवेक्षकों को अब पहले से परीक्षा हॉल आवंटित नहीं किए जाएंगे। पर्यवेक्षक कार्य में लगे शिक्षकों को परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले सूचित किया जाएगा कि उन्हें किस हॉल में ड्यूटी करनी है।
साथ ही परीक्षा केंद्र पर 50 फीसदी स्टाफ दूसरे संस्थानों से तैनात किया जाएगा। परीक्षा कार्य में लगे शिक्षक और कर्मियों को किसी भी तरह का इलेक्ट्रॉनिक और कैमरा डिवाइस ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा परीक्षा की प्रत्येक पाली के लिए प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं कोषागार से अलग से ली जाएंगी।
योगी सरकार की नई परीक्षा नीति
यूपी में परीक्षा लीक रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को नीचे बिंदुओं से समझें-
- भर्ती परीक्षा कराने के लिए 4 एजेंसियों की अलग-अलग जिम्मेदारी होगी।
- अभ्यर्थियों को अपने गृह मंडल से बाहर परीक्षा देने जाना होगा।
- दिव्यांगों और महिलाओं पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
- आयोग और बोर्ड में ही ओएमआर शीट स्कैन की जाएगी।
- 4 लाख से अधिक अभ्यर्थी होने पर दो चरणों में परीक्षा कराई जाएगी।
- यूपीपीसीएस प्री पर यह नियम लागू नहीं होगा।
- गैर सहायता प्राप्त स्कूल और कॉलेजों में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे।
- प्रश्नपत्र लाने और ले जाने के लिए बक्सों में टैंपर प्रूफ मल्टीलेयर पैकेजिंग होगी।
- प्रश्नपत्र सेट करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। ओएमआर शीट तीन सेट में होगी।
- मूल प्रति आयोग और बोर्ड के पास रहेगी। दूसरी सीलबंद कोषागार और तीसरी अभ्यर्थियों को दी जाएगी।
- प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी का परीक्षा नियंत्रक द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाएगा।
- परीक्षा के समय आयोग और बोर्ड किसी भी तरह की अफवाह का खंडन करेंगे।
- परीक्षा के दौरान एसटीएफ और पुलिस के संपर्क में रहेंगे।
- परीक्षा केंद्र पर कंट्रोल रूम से कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
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