UP Madarsa Board: मदरसों के छात्र-छात्राओं को दी जाएगी संविधान और कानून की शिक्षा, किताब जारी
Press Trust of India | May 9, 2026 | 09:33 PM IST | 3 mins read
जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तर प्रदेश के विधिक सलाहकार मौलाना काब रशीदी द्वारा लिखित ‘भारतीय संविधान, एक वैचारिक अध्ययन’ शीर्षक वाली इस किताब को मदरसों के ‘सौम’ दर्जे से पढ़ाया जाएगा।
लखनऊ: मदरसों के पाठ्यक्रम संबंधी सुधार के लिए सरकार के प्रयासों के बीच इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को देश के संविधान और कानून के बारे में बाकायदा पढ़ाने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए 9 मई को एक किताब जारी की गई जिसे पूरे देश में मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश की जाएगी।
भारतीय संविधान, एक वैचारिक अध्ययन -
जमीयत उलेमा-ए-हिंद उत्तर प्रदेश के विधिक सलाहकार मौलाना काब रशीदी द्वारा लिखित ‘भारतीय संविधान, एक वैचारिक अध्ययन’ शीर्षक वाली इस किताब को मदरसों के ‘सौम’ दर्जे से पढ़ाया जाएगा जो आमतौर पर इंटरमीडिएट के समकक्ष माना जाता है। यह किताब पांच खंडों में होगी और इसका 10 भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी कराया जाएगा ताकि यह पूरे मुल्क में पहुंचे।
रशीदी ने लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में इस किताब का औपचारिक विमोचन करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि यह पुस्तक भारत के संविधान और विभिन्न कानूनों की मूलभूत जानकारी के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय समेत विभिन्न अदालतों के ऐतिहासिक आदेशों को खुद में समेटे है। रशीदी ने कहा कि इस किताब से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को अपने कानूनी तथा संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी मिलेगी जिससे वह और बेहतर नागरिक बनेंगे।
उन्होंने बताया कि यह किताब मदरसों में सुधार की एक शुरुआत है और इस किताब का एक उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को यह भी बताना है कि उनके पुरखों ने किस तरह से राष्ट्र सेवा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया और वे किस तरह उन पूर्वजों से प्रेरित होकर भारत को विश्व गुरु बनाने में अपना योगदान करें।
काब रशीदी ने बताया कि 'भारतीय संविधान एक वैचारिक अध्ययन' शीर्षक वाली इस किताब में कुल सात अध्याय हैं और इसे मनोवैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है ताकि मदरसों के बच्चे इसमें शामिल सामग्री को बेहतर ढंग से समझ सकें और उसे अपने जीवन में उतार सकें। उन्होंने कहा कि इस किताब के चार और खंड प्रकाशित किए जाएंगे और देश की 10 अन्य भाषाओं में इसका अनुवाद भी किया जाएगा।
भारत के कुल 15 राज्यों में किया जाएगा किताब का विमोचन -
आगे कहा कि भारत के कुल 15 राज्यों में इस किताब का विमोचन किया जाएगा जिसकी शुरुआत आज से की गई है। उन्होंने कहा कि इस किताब को देश के सभी मदरसों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, इसके लिए व्यापक अभियान चलाते हुए देश के तमाम मदरसों तथा दीनी तालीम देने वाले अन्य संस्थानों से संपर्क किया जाएगा।
मौलाना रशीदी ने बताया कि इसके अलावा देश की विभिन्न मदरसा शिक्षा परिषदों से भी संपर्क किया जाएगा कि वे अपनी निगरानी वाले मदरसों के पाठ्यक्रम में इस किताब को भी शामिल करें।
रशीदी ने कहा कि देश के मदरसों में लागू पाठ्यक्रमों में भारत के संविधान और कानून को एक विषय के रूप में पढ़ाये जाने के उदाहरण लगभग न के बराबर हैं, लिहाजा मौजूदा हालात में बहुत जरूरी है कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को और एक बेहतर तथा अधिक जागरुक नागरिक बनाने के लिए उन्हें देश के कानून और संविधान के बारे में भी पढ़ाया जाए, यह पुस्तक इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही तैयार की गई है।
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