Saurabh Pandey | August 3, 2026 | 10:16 PM IST | 2 mins read
कोर्ट ने कहा कि टीईटी न केवल योग्यता की एक अनिवार्य शर्त है, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से जुड़ी एक संवैधानिक आवश्यकता भी है। कोर्ट ने आगे कहा कि कानूनी ढांचे का मकसद प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करना और पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार करना है।

नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए जरूरी 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) क्वालिफिकेशन हासिल करने की समय-सीमा 31 अगस्त, 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी है।
संसद में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री जोशी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई, 2026 को रिव्यू याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए शिक्षकों को 'राइट ऑफ चिल्ड्रन टू फ्री एंड कंपल्सरी एजुकेशन (RTE) एक्ट, 2009' के तहत नियुक्ति के लिए जरूरी न्यूनतम क्वालिफिकेशन हासिल करने और उसे पूरा करने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया है।
जोशी ने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 1 सितंबर, 2025 के अपने फैसले में यह कहा था कि 'RTE एक्ट, 2009' की धारा 23 के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षक के तौर पर नियुक्ति पाने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) पास करना एक जरूरी न्यूनतम क्वालिफिकेशन है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और शिक्षकों की भर्ती, सेवा की शर्तें और तैनाती संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आती हैं।
अपने हालिया फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों और अन्य संबंधित अधिकारियों को टीईटी परीक्षा साल में कम से कम दो बार आयोजित करने की कोशिश करनी चाहिए, और दोनों परीक्षाओं के बीच लगभग छह महीने का अंतर होना चाहिए।
कोर्ट के अनुसार, नियमित रूप से परीक्षा आयोजित करने से योग्य शिक्षकों को कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के भीतर शिक्षक के तौर पर नियुक्ति के लिए ज़रूरी न्यूनतम योग्यता हासिल करने और उसे पूरा करने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।
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शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के संबंध में, मंत्री ने यह भी कहा कि 2013 से पहले नियुक्त किए गए शिक्षक, जिन पर अनिवार्य टीईटी की शर्त का असर पड़ सकता है, उनके रिकॉर्ड संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रखे जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि टीईटी न केवल योग्यता की एक अनिवार्य शर्त है, बल्कि यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से जुड़ी एक संवैधानिक आवश्यकता भी है। कोर्ट ने आगे कहा कि कानूनी ढांचे का मकसद प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करना और पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार करना है।