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छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति के पाठ पढ़ेंगे कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी, अधिकारियों ने दी जानकारी

Press Trust of India | August 25, 2026 | 07:40 AM IST | 2 mins read

विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की विविध कला और सांस्कृतिक विधाओं पर पाठ्य सामग्री तैयार करना है। (प्रतीकात्मक-मैग्नीफिक)
कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की विविध कला और सांस्कृतिक विधाओं पर पाठ्य सामग्री तैयार करना है। (प्रतीकात्मक-मैग्नीफिक)

रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूली छात्र छठी कक्षा से 12वीं कक्षा तक स्थानीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से जुड़े विशेष पाठ पढ़ेंगे, जिससे नयी पीढ़ी अपनी माटी और संस्कृति से गहरे से जुड़ सकेगी। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति, इतिहास, धरोहर, स्थापत्य, लोक परंपराओं, गीत-संगीत, संतों, महापुरुषों और रचनाकारों को नयी पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि इसी उद्देश्य से राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), शंकर नगर, रायपुर में 24 से 26 अगस्त तक त्रि-दिवसीय आवासीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

स्थानीय कला-संस्कृति के बारे में जानेंगे छात्र

कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति पर केंद्रित 'आर्ट रिपोजिटरी' तैयार करने के लिए प्रदेशभर के साहित्यकार, विषय-विशेषज्ञ, संस्कृतिविद, शोधकर्ता एवं जनसंचार विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ स्थानीय कला-सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पाठ्य व दृश्य सामग्री विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी होगी।

कार्यशाला का उद्देश्य राज्य की विविध कला और सांस्कृतिक विधाओं पर पाठ्य सामग्री तैयार करना है। विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए प्रत्येक विषय से संबंधित 5 से 10 मिनट की लघु फिल्मों के लिए पटकथा भी तैयार की जाएगी।

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कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, विषय-विशेषज्ञों, संस्कृतिविदों, शोधकर्ताओं तथा जनसंचार विशेषज्ञों द्वारा राज्य की संस्कृति, सभ्यता और कला से जुड़े लगभग 100 विषयों पर लेखन और मार्गदर्शन किया जा रहा है।

इन विषयों को प्रमुख विधाओं में विभाजित कर विषयवार समूह गठित किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि 'आर्ट रिपोजिटरी' में छत्तीसगढ़ की विभूतियों, संतों और महापुरुषों के योगदान को भी स्थान दिया जाएगा।

इनमें लोमश ऋषि, वाल्मीकि, वल्लभाचार्य, गुरु घासीदास, राजा चक्रधर, पद्मश्री तीजन बाई, विनोद कुमार शुक्ल, सुरुज बाई खांडे, माधवराव सप्रे, मिनीमाता, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, मुकुटधर पाण्डेय, पंडित सुंदरलाल शर्मा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित अनेक विभूतियां शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही राज्य की स्थापत्य कला और तीर्थ स्थलों, पर्व, लोकनृत्य, संगीत और शिल्प को भी पाठ्य सामग्री का हिस्सा बनाया जाएगा।

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