Rao IAS Study Circle Case: दिल्ली के राव आईएएस स्टडी सर्किल हादसे में SFI ने अधिकारियों से की कार्रवाई की मांग
Abhay Pratap Singh | July 28, 2024 | 06:13 PM IST | 2 mins read
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने कहा कि, “हम कड़ी एवं शीघ्र जांच कराने और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग करते हैं।”
नई दिल्ली: ओल्ड राजेंद्र नगर (दिल्ली) स्थित राव आईएएस स्टडी सर्कल के बेसमेंट में बाढ़ के कारण तीन छात्रों की मौत पर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने दुःख व्यक्त किया है। छात्र संगठन एसएफआई ने यूपीएससी उम्मीदवारों की मौत मामले में अधिकारिकयों से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
राव आईएएस स्टडी सर्किल हादसे में मृतकों में दो छात्राएं और एक छात्र शामिल है। बताया गया कि केरल निवासी मृतक छात्र जेएनयू से पीएचडी कर रहा था। एसएफआई ने बताया कि, हाल ही में इसी इलाके में एक अन्य छात्र की भी बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मुआवजे की मांग करते हुए कहा कि, “हम कड़ी एवं शीघ्र जांच कराने और जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग करते हैं।”
राज्यसभा सांसद डॉ. वी शिवदासन के साथ वीपी सानू सहित एसएफआई के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार देर रात से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की। वहीं, एसएफआई के मयूख बिस्वास (महासचिव), वीपी सानू (अध्यक्ष), नितीश नारायणन (उपाध्यक्ष), आइशी घोष (केंद्रीय सचिवालय सदस्य) के साथ सांसद के राधाकृष्णन और डॉ वी शिवदासन ने आरएमएल अस्पताल में मृतकों के परिजनों से मुलाकात की।
एसएफआई ने कहा कि जिन तीन निर्दोष छात्रों की जान गई है, वे परीक्षा के केंद्रीकरण के कारण लालची कोचिंग व्यवसाय के शिकार हुए हैं। आगे कहा कि, एसएफआई ने शिक्षा को होने वाली अपूरणीय क्षति के बारे में सरकार को बार-बार आगाह किया था। इस घटना की केंद्र सरकार को जिम्मेदारी उठानी होगी।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के अध्यक्ष धनंजय ने मामले में कहा कि, ओल्ड राजेंद्र नगर में हुए हादसे को 24 घंटे से ज्यादा हो गए हैं। अब तक राव के आईएएस मालिक ने प्रदर्शनकारी छात्रों को अपना चेहरा तक नहीं दिखाया है। दिल्ली पुलिस घायलों और जान गंवाने वालों की सही संख्या बताने से भी इनकार कर रही है।
धनंजय ने आगे कहा कि इसे एक अकेली घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। छात्रों से सालाना लाखों रुपये वसूलने के बावजूद निजी संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव पाया जाता है। जानमाल के नुकसान की बार-बार और नियमित घटनाओं के बावजूद सरकार ने इस खुली लूट को नियंत्रण में लाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है।
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