यूजीसी के नियमों से जुड़े मुद्दे को लेकर बिहार विधानसभा में हंगामा, राजद ने भाजपा को बताया दलित विरोधी
Press Trust of India | February 20, 2026 | 10:35 PM IST | 1 min read
राष्ट्रीय जनता दल के विधायक ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल दलित-विरोधी व आरक्षण-विरोधी हैं, इसी कारण वे यूजीसी के इन विनियमों का विरोध कर रहे हैं।
पटना: बिहार विधानसभा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियम, 2026 के मुद्दे को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। हालांकि इन विनियमों पर उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-मार्क्सवादी लेनिनवादी (माले) लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक विशेष जाति और मानसिकता ने यूजीसी विनियमों का विरोध किया, जिसके कारण उच्चतम न्यायालय ने इस पर अंतरिम स्थगन लगा दिया।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह इस संबंध में संसद के माध्यम से कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार से पहल करे। सौरभ ने तर्क दिया कि विश्वविद्यालय परिसरों में जातिगत पूर्वाग्रह समाप्त करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए इस प्रकार का विधिक ढांचा आवश्यक है।
भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक ने चर्चा के दौरान आपत्तिजनक जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कार्यवाही से हटा दिया। अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भाकपा लिबरेशन के विधायक द्वारा जातिसूचक शब्द का प्रयोग पूरे विपक्ष की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी पर विपक्षी सदस्य आक्रोशित हो गए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक आलोक मेहता ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल दलित-विरोधी व आरक्षण-विरोधी हैं, इसी कारण वे यूजीसी के इन विनियमों का विरोध कर रहे हैं। स्थिति बिगड़ने पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित कराया।
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Santosh Kumar | 1 min readविशेष समाचार
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