सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में आरक्षित पद खाली रखना बहुजनों को नीतियों से बाहर रखने की साजिश- राहुल गांधी का आरोप
Santosh Kumar | July 25, 2025 | 03:55 PM IST | 1 min read
राहुल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "संसद में मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े बहुजनों की हकमारी और संस्थागत मनुवाद के पक्के सबूत हैं।"
नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार (25 जुलाई) को केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए संकाय पदों को खाली रखना इन वर्गों को शिक्षा, अनुसंधान और नीतियों से बाहर रखने की साजिश है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बहुजन को उनका अधिकार मिलना चाहिए। राहुल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "संसद में मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए ये आंकड़े बहुजनों की हकमारी और संस्थागत मनुवाद के पक्के सबूत हैं।"
उन्होंने दावा किया, "केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर के एसटी (अनुसूचित जनजाति) के 83 प्रतिशत, ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के 80 प्रतिशत और एससी (अनुसूचित जाति) के 64 प्रतिशत पद जानबूझकर खाली रखे गए हैं।"
राहुल के अनुसार, एसोसिएट प्रोफेसर के एसटी के 65 प्रतिशत, ओबीसी के 69 प्रतिशत और एससी के 51 प्रतिशत पद भी रिक्त छोड़ दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, एक सोची-समझी साजिश है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गांधी ने कहा, "मनुवादी सोच के तहत हजारों योग्य एससी, एसटी, ओबीसी उम्मीदवारों को "कोई योग्य उम्मीदवार नहीं मिला" के नाम पर अयोग्य ठहराया जा रहा है और सरकार कोई जवाबदेही लेने को तैयार नहीं।"
राहुल गांधी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि ये बातें पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं। उन्होंने सरकार से माँग की कि सभी रिक्त पदों को तुरंत भरा जाए। उन्होंने कहा कि बहुजनों को उनका अधिकार मिलना चाहिए, न कि मनुवादी बहिष्कार।
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