Online School Classes: पश्चिम एशिया संकट के बीच ऑनलाइन स्कूल कक्षाओं का विकल्प चुनने की पीएम मोदी ने की अपील
Abhay Pratap Singh | May 12, 2026 | 09:00 AM IST | 2 mins read
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों के मद्देनजर बचत के अपने प्रयासों को और तेज करते हुए स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपनी अपील को दोहराया और लोगों से इस संकट को देखते हुए सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की।
पाटीदार समुदाय द्वारा निर्मित सरदार धाम छात्रावास का उद्घाटन करने के बाद वडोदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संयम बरतने संबंधी अपनी पिछली टिप्पणियों पर विपक्ष की आलोचना का सीधा जवाब देने से परहेज किया और इसके बजाय ऐसे उपायों का पालन करने की अपनी अपील पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने कहा, “पहले कोविड-19 महामारी का संकट आया, उसके बाद वैश्विक आर्थिक चुनौतियां आईं और अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इन सभी परिस्थितियों का प्रभाव पूरी दुनिया में लगातार महसूस किया जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।” मोदी ने कहा, “जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।”
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प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा कि वे फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दें।” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम नागरिकों पर संकट के न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को जन भागीदारी की शक्ति की आवश्यकता है।
उन्होंने अपने गृह राज्य गुजरात में हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन परिणामों पर पूरे देश में चर्चा हो रही है। इस कार्यक्रम में सरदार धाम और उमिया धाम सहित नौ प्रमुख पाटीदार संगठनों ने राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए मोदी को ‘सरदार गौरव रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित किया।
पीएम नरेंद्र मोदी ने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में लिखा, “बदलाव व्यापक हो, और परिणाम स्थायी हों... इसके लिए समाज और सरकार को मिलकर काम करना आवश्यक होता है। इसलिए, आज शिक्षा के क्षेत्र में जमीनी हकीकतों के आधार पर काम हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका बहुत बड़ा उदाहरण है।”
(पीटीआई से प्राप्त इनपुट के आधार पर)
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