NCERT: एनसीईआरटी मॉड्यूल पर विवाद, कथित तौर पर जिन्ना, माउंटबेटन और कांग्रेस को भारत विभाजन का जिम्मेदार माना
Press Trust of India | August 16, 2025 | 05:23 PM IST | 3 mins read
एनसीईआरटी ने दो अलग-अलग मॉड्यूल प्रकाशित किए हैं- एक कक्षा 6 से 8 (मध्य स्तर) के लिए और दूसरा कक्षा 9 से 12 (माध्यमिक स्तर) के लिए। ये अंग्रेजी और हिंदी में पूरक संसाधन हैं, नियमित पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं हैं, और इनका उपयोग प्रोजेक्ट, पोस्टरों, चर्चाओं और वाद-विवादों के माध्यम से किया जाना है।
नई दिल्ली : राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है, अब एक मॉड्यूल के लिए जिसमें कथित तौर पर मोहम्मद जिन्ना, लॉर्ड माउंटबेटन और कांग्रेस को विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इंटरनेट पर इन दावों को लेकर लोगों की राय बटी हुई है, जहां विपक्षी दल भाजपा सरकार की निंदा कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे सच्चाई का खुलासा मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई लोगों द्वारा साझा किए गए एनसीईआरटी मॉड्यूल में कहा गया है कि जिन्ना ने विभाजन की मांग की, कांग्रेस ने योजनाओं को स्वीकार किया और ब्रिटिश नेता ने इसे लागू किया। 'विभाजन के अपराधी' शीर्षक के तहत, पुस्तक में बताया गया है कि कैसे माउंटबेटन ने सत्ता हस्तांतरण की तारीख जून 1948 से अगस्त 1947 कर दी, जिसके कारण तैयारियों में कमी आई और भारतीयों में राष्ट्रीयता को लेकर भारी भ्रम पैदा हुआ।
एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के मॉड्यूल में लिखा है-
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक के मॉड्यूल में लिखा है - इस तरह, अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत का विभाजन हो गया। लेकिन यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था। भारत के विभाजन के लिए तीन तत्व ज़िम्मेदार थे- जिन्ना, जिन्होंने इसकी मांग की; दूसरे, कांग्रेस, जिसने इसे स्वीकार किया और तीसरे, माउंटबेटन, जिन्होंने इसे लागू किया।
उन्होंने सत्ता हस्तांतरण की तारीख जून 1948 से अगस्त 1947 कर दी। उन्होंने सभी को इसके लिए राजी कर लिया। इस वजह से, विभाजन से पहले पूरी तैयारी नहीं हो सकी। विभाजन की सीमाओं का सीमांकन भी जल्दबाजी में किया गया। इसके लिए सर सिरिल रेडक्लिफ़ को केवल पांच हफ़्ते का समय दिया गया। पंजाब में, 15 अगस्त 1947 के दो दिन बाद भी, लाखों लोगों को यह पता नहीं था कि वे भारत में हैं या पाकिस्तान में। ऐसी जल्दबाजी एक बड़ी लापरवाही थी।
मॉड्यूल में सरदार वल्लभभाई पटेल के हवाले से कहा गया है कि भारत में स्थिति विस्फोटक हो गई है। भारत एक युद्धक्षेत्र बन गया है, और गृहयुद्ध की बजाय देश का विभाजन करना बेहतर है।
इसमें महात्मा गांधी के रुख का हवाला देते हुए कहा गया है कि उन्होंने विभाजन का विरोध किया था, लेकिन हिंसा के जरिए कांग्रेस के फैसले का विरोध नहीं करेंगे। पाठ में लिखा है- "उन्होंने कहा कि वे विभाजन में भागीदार नहीं हो सकते, लेकिन वे हिंसा के जरिए कांग्रेस को इसे स्वीकार करने से नहीं रोकेंगे।"
NCERT: एआईसीसी ने कड़ी टिप्पणी की
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) समेत विपक्ष के कई नेताओं ने NCERT की किताबों में दिए गए संदर्भों पर कड़ी टिप्पणी की। किताब को आग लगाने की मांग करते हुए, नेताओं ने कहा, एनसीईआरटी में पन्ने भले ही जोड़े गए हों, लेकिन भाजपा 1938, 1940, 1942 आदि के अपने इतिहास के काले पन्नों को नहीं मिटा सकती।
उन्होंने भाजपा के वैचारिक पूर्ववर्ती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर इशारा करते हुए कहा कि कैसे वह भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलनों में निष्क्रिय पाया गया था।
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सोशल मीडिया पर यूजर्स की प्रतिक्रिया
इस बीच, कुछ लोग एनसीईआरटी के समर्थन में आए और इतिहास का संतुलित विवरण साझा करने के लिए परिषद की प्रशंसा की। एक एक्स यूजर ने एक पोस्ट में कहा, "जब #एनसीईआरटी सच लिखता है तो कुछ लोग नाराज़ क्यों होते हैं? आज़ादी किसी एक पार्टी की बपौती नहीं थी; यह लाखों बलिदानों का परिणाम थी। विभाजन की त्रासदी जिन्ना, कांग्रेस और माउंटबेटन की देन थी। इतिहास छिपाना बंद करो, सच्चाई से भागना बंद करो।"
एक अन्य एक्स यूजर ने लिखा - एक बेहतरीन पहल, दोषारोपण के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई और सुलह के लिए। क्योंकि एक ईमानदार राष्ट्र को अपने पूरे इतिहास का सामना करना पड़ता है, न कि सिर्फ़ उन हिस्सों का जो उसके लिए आरामदायक हैं। हमारे छात्र सिर्फ़ यह नहीं सीखेंगे कि क्या हुआ, बल्कि यह भी कि इसकी कीमत क्यों चुकाई गई।
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