MBBS Admission: केवल 40 प्रतिशत दिव्यांगता छात्र को एमबीबीएस में दाखिल से नहीं रोकती - उच्चतम न्यायालय
Press Trust of India | October 15, 2024 | 03:33 PM IST | 1 min read
पीठ ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवार की एमबीबीएस पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार (15 अक्टूबर) को कहा कि केवल 40 प्रतिशत दिव्यांगता का तय मानक किसी को मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से नहीं रोकता। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि, जब तक कि विशेषज्ञ की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख न हो कि अभ्यर्थी एमबीबीएस करने में असमर्थ है।
न्यायामूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने अपने 18 सितंबर के आदेश के लिए विस्तृत कारण बताए।
इस आदेश में न्यायालय ने एक उम्मीदवार को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने की अनुमति दी थी क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वह बिना किसी बाधा के मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने में समर्थ है।
पीठ ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवार की एमबीबीएस पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए। बेंच ने कहा, केवल निर्धारित मानक की दिव्यांगता होने के आधार पर अभ्यर्थी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए पात्रता के अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
Also read MBBS Student Suicide: यूपी के निजी मेडिकल कॉलेज में फंदे से लटका मिला एमबीबीएस छात्र का शव
आगे कहा कि, अभ्यर्थी की दिव्यांगता का आकलन करने वाले विकलांगता बोर्ड को सकारात्मक रूप से यह दर्ज करना होगा कि अभ्यर्थी की दिव्यांगता पाठ्यक्रम की पढ़ाई में अभ्यर्थी के लिए बाधा बनेगी या नहीं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि विकलांगता बोर्ड को यह भी बताना चाहिए कि क्या वह इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि उम्मीदवार पाठ्यक्रम में पढ़ाई के लिए असमर्थ है। अगर ऐसा है तो उसे कारण बताना चाहिए।
न्यायालय ने ओंकार नामक छात्र की याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसने 1997 के स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियमन को चुनौती दी है जो 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले अभ्यर्थी को एमबीबीएस करने से रोकता है।
अगली खबर
]IIT Madras: आईआईटी मद्रास ने सस्टेनेबल बायोमैन्युफैक्चरिंग कोर्स के लिए फ्रेंच यूनिवर्सिटी के साथ साझेदारी की
इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्राकृतिक पौधों के निष्कर्षण और कुल रासायनिक संश्लेषण के विकल्प के रूप में उच्च मूल्य वाले पौधों के मेटाबोलाइट्स का निरंतर उत्पादन करने के लिए अत्याधुनिक उपलब्ध तकनीकों से परिचित कराना है।
Abhay Pratap Singh | 1 min readविशेष समाचार
]- NEET Exam: नीट की कंप्यूटर आधारित परीक्षा से गड़बड़ियों पर लगेगी रोक, बोले पूर्व यूजीसी अध्यक्ष जगदीश कुमार
- JEE Main 2026 Session 2: जेईई मेन सेशन 2 के लिए परसेंटाइल, रॉ मार्क्स व नॉर्मलाइजेशन का सरल विश्लेषण जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी भोपाल में बीटेक प्रवेश के लिए जेईई मेन में कितने अंक होने चाहिए; जानें कटऑफ, फीस, पैकेज
- JEE Main 2026 Cutoff for General Category: जेईई मेन 2026 के लिए सामान्य कैटेगरी की अपेक्षित कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी पटना के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- JEE Main 2026: एनआईटी इलाहाबाद में प्रवेश के लिए जेईई मेन में कितने अंक चाहिए? पात्रता, फीस और कटऑफ जानें
- JEE Main 2026: एनआईटी दिल्ली के लिए जेईई मेन में कितने मार्क्स चाहिए? जानें पात्रता, फीस, कटऑफ, औसत पैकेज
- राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, ‘लाडू’, ‘रोटलो’ और ‘मोटो बापो’ जैसे स्थानीय शब्द होंगे शामिल
- राजस्थान में 7,000+ कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जताया विरोध
- अगले 5 साल में 10 अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की योजना, आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने दी जानकारी