आईआईएम लखनऊ ने डॉक्टरेट रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए PGP 1999 बैच के पूर्व छात्रों के सहयोग से फेलोशिप की शुरू
Abhay Pratap Singh | November 26, 2025 | 03:49 PM IST | 2 mins read
99 मूनशॉट्स फेलोशिप के पहले प्राप्तकर्ता के रूप में आयुषी सिंह, रिसर्च स्कॉलर (ऑपरेशंस एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट) और सतीश कुमार, पीएचडी स्कॉलर (स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट) का नाम घोषित किया गया है।
नई दिल्ली: भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ (IIM Lucknow) ने संस्थान के स्नातकोत्तर कार्यक्रम (PGP) 1999 बैच के छात्रों के सहयोग से वित्तपोषित 99 मूनशॉट्स (99 Moonshots) नाम से एक फेलोशिप अनुदान की शुरुआत की है। इस फेलोशिप का उद्देश्य डॉक्टरेट शोधार्थियों के बीच शोध उत्पादकता को बढ़ावा देना है।
आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रोफेसर एमपी गुप्ता ने कहा, “मुझे पीएचडी छात्रों के लिए आईआईएम लखनऊ 1999 बैच की फेलोशिप की घोषणा करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है। यह एक सार्थक पहल है जो हमारे पूर्व छात्रों की शोध उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। आयुषी सिंह और सतीश कुमार को प्रथम प्राप्तकर्ता के रूप में मान्यता देना प्रभावशाली छात्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए एक मज़बूत मिसाल कायम करता है।”
फेलोशिप चयन प्रक्रिया में आवेदकों को अपना शोध प्रस्ताव चयन समिति के सामने रखना था, जहां प्रस्तावों को निर्धारित मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। सिलेक्शन प्रोसेस के बाद दो PhD स्कॉलर्स को अनुदान के लिए रिकमेंड किया गया:
- आयुषी सिंह (PhD 23028) – ऑपरेशंस और सप्लाई चेन मैनेजमेंट
- सतीश कुमार (PhD 23033) – स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट
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IIM Lucknow 99 Moonshots Fellowship: फेलोशिप के अतिरिक्त अनुदान
- शीर्ष स्तरीय (श्रेणी ए और उससे ऊपर) पत्रिकाओं में प्रकाशित या स्वीकृत शोध के लिए 1 लाख रुपये का प्रकाशन पुरस्कार।
- स्कॉलर्स को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुति देने के लिए 3 लाख रुपये का सम्मेलन अनुदान।
- पीएचडी कार्यक्रम मैनुअल के अनुरूप, आकस्मिकता और डेटा-संग्रह अनुदान सहित शैक्षणिक सहायता।
आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि, सतत शैक्षणिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए पुरस्कार विजेता प्रत्येक छह माह में अपने शोध अपडेट को एक निगरानी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे, जिसमें उनकी थीसिस सलाहकार समिति (TAC) और 1999 बैच का एक प्रतिनिधि शामिल होगा।
फेलोशिप प्राप्त करने पर आयुषी सिंह ने कहा, यह अनुदान प्राप्त करना वास्तव में प्रेरणादायक है और मैं पीजीपी 1999 बैच के छात्रों के विचारशील सहयोग के लिए उनका आभारी हूं। वहीं, सतीश कुमार ने कहा, फेलोशिप मिलने से मुझे अपने शोध पर और भी ज्यादा ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा मिली है। मैं इस पहल के लिए अपने मार्गदर्शकों, सलाहकार समिति और 1999 के पीजीपी बैच का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।
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