Press Trust of India | February 4, 2026 | 10:20 AM IST | 1 min read
गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा कि आवेदन पत्र में किसी कमी के कारण किसी मेधावी छात्र के करियर को नुकसान नहीं होना चाहिए।

अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) को निर्देश दिया है कि वह नीट-पीजी के तहत प्रवेश के लिए एनआरआई कोटे के तहत एक छात्रा को मेरिट सूची में शामिल करने पर विचार करे। अदालत ने कहा कि आवेदन पत्र में किसी कमी के कारण किसी मेधावी छात्र के करियर को नुकसान नहीं होना चाहिए।
याचिकाकर्ता स्वरा भट्ट ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा–स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) परीक्षा दी थी और वह अनिवासी भारतीय (एनआरआई) कोटे के तहत दाखिले के लिए पात्र थीं।
हालांकि, आवेदन के दौरान एनआरआई प्रायोजक की पासबुक अपलोड न करने के कारण उन्हें दाखिले से वंचित कर दिया गया था। अपनी पसंद के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला न मिलने के बाद मेडिकल छात्रा ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
सोमवार को दाखिले की अंतिम समयसीमा समाप्त होने से महज 20 मिनट पहले पारित आदेश न्यायमूर्ति निर्झर देसाई ने कहा कि ऐसी छोटी-सी चूक (एनआरआई प्रायोजक की पासबुक अपलोड न करना) याचिकाकर्ता के लिए जीवन भर के पछतावे का कारण नहीं बननी चाहिए।"
अदालत ने कहा, "हालांकि पासबुक अपलोड करना अनिवार्य शर्त है, लेकिन ऐसी कमी के कारण किसी मेधावी छात्र का करियर प्रभावित नहीं होना चाहिए।" इस बीच गुजरात नीट पीजी राउंड 3 संशोधित मेरिट सूची जारी कर दी गई है।