Press Trust of India | July 21, 2026 | 02:26 PM IST | 1 min read
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ''अदालत को इन सब मामलों में नहीं घसीटें।'' पीठ ने कहा कि मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के ''संसद चलो'' मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा ''अत्यधिक बल प्रयोग'' के मामले में दायर याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ''अदालत को इन सब मामलों में नहीं घसीटें।'' पीठ ने कहा कि मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिकाकर्ता ने मामले में तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया और कहा कि दिल्ली पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर ''बहुत अधिक बल'' का इस्तेमाल किया।
सोमवार को सीजेपी की ओर से आयोजित 'संसद चलो' मार्च में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया। वे अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे।
कॉजपा ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए बहुत अधिक बल का इस्तेमाल किया। पार्टी का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए।
साथ ही, कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ धक्का-मुक्की की गई। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आंग्मो से दुर्व्यवहार की बात से इनकार किया और इस तरह की रिपोर्ट को ''पूरी तरह से झूठा और गुमराह करने वाला'' बताया।
एनटीए ने कहा कि घोषित परिणामों में अब तक कोई गलती साबित नहीं हुई है। एजेंसी ने चेतावनी दी कि फर्जी दस्तावेज या छेड़छाड़ की गई ओएमआर शीट पेश करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ उम्मीदवारी रद्द करने, परीक्षा से प्रतिबंधित करने सहित आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
Santosh Kumar