CUET Exam 2025: सीयूईटी में 6 मिनट देरी से पहुंचने वाली छात्रा को दिल्ली एचसी से नहीं मिली राहत, याचिका खारिज
Press Trust of India | June 5, 2025 | 07:48 PM IST | 2 mins read
पीठ ने पाया कि राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के सूचना बुलेटिन और प्रवेश पत्र में परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले सुबह करीब 7 बजे केंद्र पर पहुंचने के बारे में बहुत स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
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Try Nowनई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi HC) ने परीक्षा की ‘शुचिता और अनुशासन’ को रेखांकित करते हुए ‘कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट’ (CUET) में 6 मिनट की देरी से शामिल होने वाली छात्रा को राहत देने से इनकार कर दिया। 18 वर्षीय छात्रा ने दावा किया कि 13 मई को वह परीक्षा के निर्धारित समय से छह मिनट बाद सुबह करीब 8:36 बजे परीक्षा केंद्र पहुंची थी, लेकिन उसे प्रवेश नहीं दिया गया।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ छात्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
पीठ ने पाया कि राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण के सूचना बुलेटिन और प्रवेश पत्र में परीक्षा शुरू होने से दो घंटे पहले सुबह करीब 7 बजे केंद्र पर पहुंचने के बारे में बहुत स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और बताया गया था कि सुबह 8.30 बजे के आसपास गेट बंद हो जाएंगे। पीठ ने कहा कि इतनी बड़ी परीक्षा के संचालन में लापरवाही से अव्यवस्था पैदा होगी और ‘परीक्षा का अनुशासन बनाए रखा जाना चाहिए’।
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न्यायालय ने 31 मई को कहा, ‘‘सीयूईटी एक महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा है और परीक्षा हॉल में समय पर पहुंचना, समय पर सीट पर पहुंचना और गेट बंद होने के समय से पहले केंद्र में होना, ये सभी परीक्षा प्रणाली के अनुशासन और लोकाचार का हिस्सा हैं, जिनमें ढील नहीं दी जानी चाहिए। क्योंकि इससे समान स्थिति वाले छात्रों के बीच भारी असमानता पैदा हो सकती है।’’
पीठ ने छात्रा की अपील खारिज कर दी और कहा, ‘‘किसी को लग सकता है कि यह केवल छह मिनट का मामला था, लेकिन गेट बंद होने के समय के नियम को सख्ती से लागू करने के लिए अधिकारियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।’’
अदालत ने कहा, ‘‘सीयूईटी यूजी परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है जिसमें देश भर से 13.54 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं। यदि अपवाद रखे जाते हैं, और ऐसी परीक्षा में अनुशासन का पालन नहीं किया जाता है, तो परीक्षा का समय पर संचालन, परिणामों की समय पर घोषणा और कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में समय पर प्रवेश सभी खतरे में पड़ सकते हैं और इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। ऐसे मामलों में, न्यायालय का हस्तक्षेप कम से कम होना चाहिए।’’
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