Saurabh Pandey | July 22, 2026 | 01:16 PM IST | 2 mins read
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर जमकर लाठिया भांजी। इस दौरान बड़ी संख्या मे छात्र प्रदर्शनकारी घायल हुए। अब इस मामले की सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है।

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ के समक्ष मामले की जानकारी देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की और पुलिस की कथित ज्यादतियों के वीडियो सबूत पेश करने का दावा किया।
उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर पुलिस ने बर्बरता की थी और याचिका में तीन मांगें की गई थीं। सीजेआई ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया और साफ कर दिया कि बेंच मामले की शुरुआती सुनवाई के चरण में वीडियो फुटेज की जांच करने की इच्छुक नहीं है।
सीजेआई ने कहा कि हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है। हम वीडियो नहीं देखना चाहते। जब वकील ने फिर से कहा कि छात्रों की पिटाई की गई थी और वीडियो सबूतों का जिक्र किया, तो सीजेआई ने कहा कि हमारा समय बर्बाद न करें।
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसी तरह के एक मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत को इसमें घसीटने की जरूरत नहीं है।
यह याचिका सोमवार 20 जुलाई, 2026 को संसद तक निकाले गए विरोध मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई से संबंधित है। मानसून सत्र के पहले दिन, हजारों छात्र और युवा प्रदर्शनकारी कथित परीक्षा अनियमितताओं के आरोप में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के मध्य में एकत्रित हुए थे। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं, जिन्होंने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा, ''अदालत को इन सब मामलों में नहीं घसीटें।'' पीठ ने कहा कि मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
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