Press Trust of India | October 13, 2026 | 10:37 AM IST | 1 min read
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जूनियर एनालिस्ट (फूड) भर्ती में बीटेक डिग्रीधारियों को एंट्री नहीं दी है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी है।

नई दिल्ली : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 'जूनियर एनालिस्ट (फूड)' के 417 पदों पर भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए बीटेक डिग्रीधारकों की याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को अपने विभागीय कैडर के पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता तय करने का पूरा अधिकार है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने पंकज कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में 2020 में संशोधित सेवा नियमों और भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि फूड टेक्नोलॉजी, डेयरी टेक्नोलॉजी, ऑयल टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक पास अभ्यर्थियों को भी जूनियर एनालिस्ट (फूड) पद के लिए पात्र माना जाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक नियम, 2011 के तहत 'फूड एनालिस्ट' पद के लिए इन विषयों में स्नातक की डिग्री मान्य है, इसलिए उन्हें भी जूनियर एनालिस्ट (फूड) पद के योग्य माना जाना चाहिए। हालांकि, राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि 'जूनियर एनालिस्ट (फूड)' और 'फूड एनालिस्ट' दो अलग-अलग पद हैं।
सरकार ने दलील दी कि जूनियर एनालिस्ट (फूड) का पद राज्य सरकार के विभागीय कैडर के अंतर्गत आता है, जबकि फूड एनालिस्ट की नियुक्तियां केंद्रीय कानून और उसके तहत बने नियमों से संचालित होती हैं।
अदालत ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि फूड एनालिस्ट के लिए योग्यता तय करने वाले केंद्रीय नियम, राज्य सरकार को जूनियर एनालिस्ट (फूड) पदों की भर्ती में हर वैकल्पिक योग्यता को शामिल करने के लिए बाध्य नहीं करते हैं। भर्ती नियमों में कोई खामी न पाते हुए हाईकोर्ट की पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।