Puja Khedkar Case: पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 14 फरवरी तक गिरफ्तारी टली
Press Trust of India | January 15, 2025 | 03:48 PM IST | 2 mins read
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर 14 फरवरी 2025 तक जवाब मांगा है और तब तक कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज 15 जनवरी को पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर को 14 फरवरी तक गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया। उन पर यूपीएससी परीक्षा में धोखाधड़ी करने और ओबीसी और दिव्यांग कोटे का अनुचित लाभ उठाने का आरोप है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली सरकार और यूपीएससी को नोटिस जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने 14 फरवरी 2025 तक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और तब तक कोई कार्रवाई न करने का आदेश दिया। खेडकर के वकील ने बताया कि हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की थी।
लूथरा ने कहा कि अगर मामले की सुनवाई होती है तो उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मजबूत निष्कर्षों के कारण दोषसिद्धि होगी। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पूजा खेडकर मामले की सुनवाई 14 फरवरी को होगी।
Puja Khedkar Case: पूजा खेडकर पर क्या आरोप है?
बता दें कि पूजा खेडकर पर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में आरक्षण लाभ प्राप्त करने के लिए गलत जानकारी देने का आरोप है। उन्होंने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।
हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि खेड़कर के खिलाफ प्रारंभिक जांच में मजबूत मामला सामने आ रहा है। कोर्ट ने कहा कि उचित जांच जरूरी है, नहीं तो व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
12 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया था, तब से उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण मिला हुआ था, जिसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा। दिल्ली पुलिस जमानत याचिका का विरोध किया।
UPSC Cheating Case: दिल्ली पुलिस ने की हिरासत की मांग
खेडकर के वकील ने तर्क दिया कि वह जांच में शामिल होने और सहयोग करने के लिए तैयार हैं, जबकि दिल्ली पुलिस अन्य लोगों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर जोर दिया।
यूपीएससी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि खेडकर ने आयोग और जनता के साथ धोखा किया है। जांच के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ जरूरी है, क्योंकि यह धोखाधड़ी दूसरों की मदद के बिना अकेले नहीं की जा सकती।
आयोग ने खेडकर के खिलाफ कई कार्रवाई शुरू की, जिसमें उनकी पहचान को गलत बताकर सिविल सेवा परीक्षा में प्रयास करने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करना और दिल्ली पुलिस ने विभिन्न अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज करना शामिल है।
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