Press Trust of India | May 9, 2026 | 07:21 AM IST | 1 min read
याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार और यूपीपीएससी ने पीठ को बताया कि अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को पहले ही नियुक्ति दी जा चुकी है।

लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने समीक्षा अधिकारी (आरओ)-सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) भर्ती परीक्षा 2023 में चयनित अभ्यर्थियों के कार्यभार ग्रहण पर शुक्रवार को रोक लगा दी। यह रोक चयन प्रक्रिया में आरक्षण लागू करने को लेकर विवाद के चलते लगाई गई है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने विवेक यादव व अन्य की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की।
अपीलकर्ताओं ने एकल न्यायाधीश की पीठ के एक फरवरी, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक मिश्रा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ओबीसी हैं और उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा में कम से कम 25 सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त किए थे, जिन्हें मुख्य परीक्षा के लिए चुना गया।
उन्होंने पीठ को बताया कि अधिक अंक होने के बावजूद अपीलकर्ताओं को प्री परीक्षा में असफल घोषित कर दिया गया। याचिका का विरोध करते हुए आयोग ने पीठ को बताया कि अधिकांश सफल अभ्यर्थियों को पहले ही नियुक्ति दी जा चुकी है।
यह फैसला पेपर लीक, नकल और बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं के आरोपों के बीच लिया गया। इस परीक्षा में लगभग 3,83,097 उम्मीदवार शामिल हुए। अब इन सभी उम्मीदवारों के लिए एक नई परीक्षा आयोजित की जाएगी।
Santosh Kumar