Santosh Kumar | August 9, 2026 | 05:01 PM IST | 2 mins read
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जैसे छात्र संगठनों ने यूजीसी और एनटीए को पत्र लिखकर प्रोविजनल आंसर की, रिस्पॉन्स शीट और नतीजे तुरंत जारी करने की मांग की है।

नई दिल्ली: जून 2026 में हुई यूजीसी नेट परीक्षा को लगभग 40 दिन बीत चुके हैं, फिर भी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने अभी तक प्रोविजनल यूजीसी नेट 2026 आंसर की जारी नहीं की है। यह परीक्षा 22 से 30 जून के बीच अलग-अलग विषयों के लिए आयोजित की गई, जबकि कुछ प्रभावित सेंटर्स के लिए दोबारा परीक्षा 5 जुलाई को हुई। लाखों उम्मीदवार अभी भी ऑफिशियल आंसर की और नतीजों के लिए अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।
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छात्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी शिकायतें जाहिर कर रहे हैं। एक उम्मीदवार ने बताया कि परीक्षा हुए 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन न तो आंसर की जारी की गई है और न ही जवाबदेही का कोई संकेत मिला है।
एनटीए की ओर से आयोजित यूजीसी नेट 2026 जून परीक्षा में शामिल हुए 7 लाख से अधिक छात्र आंसर की का इंतजार कर रहे हैं, जबकि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की वैकेंसी और पीएचडी में एडमिशन की समय-सीमाएं निकलती जा रही हैं।
उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि अगर 10 अगस्त तक आंसर-की जारी नहीं हुई, तो वे 11 अगस्त को एनटीए दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि नतीजों के बिना वे नौकरी या पीएचडी के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
पिछले सालों में, परीक्षा खत्म होने के 7 से 15 दिनों के अंदर आंसर की जारी कर दी जाती थी; लेकिन इस बार इसमें काफी देरी हुई है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर अब सीजेपी की तरह ही यूजीसी नेट जनता पार्टी का भी उदय हुआ है।
जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जैसे छात्र संगठनों ने यूजीसी और एनटीए को पत्र लिखकर प्रोविजनल आंसर की, रिस्पॉन्स शीट और नतीजे तुरंत जारी करने की मांग की है।
कई विश्वविद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन नेट स्कोर न होने के कारण उम्मीदवार आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। एनटीए ने इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या समय-सीमा जारी नहीं की है।
इस जानकारी में बिहार के शिक्षा विभाग और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के तहत स्कूल शिक्षकों की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की तारीखों का जिक्र है। आयोग ने साफ किया है कि यह जानकारी पूरी तरह से फर्जी है।
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