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UGC ACT 2026: यूजीसी के नए नियमों के विरोध में उत्तर प्रदेश में भाजपा की एक पदाधिकारी ने दिया इस्तीफा

Press Trust of India | January 28, 2026 | 07:39 AM IST | 1 min read

भाजपा की जिला इकाई प्रमुख को लिखे पत्र में भाजपा महिला मोर्चा की जिला मंत्री शशि तोमर ने कहा, मैं यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 का समर्थन नहीं करती।

यूजीसी द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 ने देश के कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों को जन्म दिया है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
यूजीसी द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 ने देश के कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों को जन्म दिया है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों से नाराज होकर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक पदाधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी (जिला मंत्री) शशि तोमर ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया है।

भाजपा की जिला इकाई प्रमुख को लिखे पत्र में शशि तोमर ने कहा, “मैं यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026 का समर्थन नहीं करती। यह नियम शिक्षा प्रणाली में जातिगत भेदभाव को बढ़ाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ करेंगे, और संविधान के प्रावधानों का भी उल्लंघन करेंगे। उन्होंने कहा, “इस नियम को लागू करने के फैसले से आहत होकर, मैं अपने पद से इस्तीफा दे रही हूं, कृपया इसे स्वीकार करें।”

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तोमर ने यह भी कहा कि वह भाजपा की जन कल्याणकारी योजनाओं, महिला सशक्तीकरण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विचारधारा को आगे बढ़ाती रहेंगी। उन्होंने पत्र में कहा, “मैं योगी आदित्यनाथ को पूरा समर्थन दूंगी और पार्टी के लिए काम करती रहूंगी।”

इस बारे में संपर्क करने पर, भाजपा की जिला इकाई के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के बारे में सुना था, लेकिन उन्हें (तोमर से) कोई लिखित इस्तीफा पत्र नहीं मिला है।

यूजीसी द्वारा जारी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 ने देश के कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन और आंदोलनों को जन्म दिया है। इन नए विनियमों का उद्देश्य वर्ष 2012 के भेदभाव-रोधी ढांचे को प्रतिस्थापित करना और इसे उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआई) में अनिवार्य रूप से लागू करना है।

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