Press Trust of India | August 6, 2026 | 03:27 PM IST | 2 mins read
एनटीए में सुधार की मांग करने वाले राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष कांति रॉय और अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत पेश हुए।

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार की मांग करने वाले, डॉक्टरों के संगठन समेत याचिकाकर्ताओं से केंद्र सरकार के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि नीट-स्नातक (यूजी) परीक्षा को कलम-कागज आधारित प्रणाली के स्थान पर, संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई-मुख्य और उन्नत) की तर्ज पर कंप्यूटर आधारित प्रणाली में कराने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि वह मामले पर 19 अगस्त को सुनवाई करेगी। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र के जवाबी हलफनामे पर अपना उत्तर दाखिल करने की अनुमति दी।
'फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन' (एफएआईएमए) की ओर से पेश अधिवक्ता तन्वी दुबे ने पीठ से कहा कि यदि परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रणाली में कराने की कोई योजना है तो इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए।
तन्वी दुबे ने आगे कहा कि फिलहाल विद्यार्थी कलम-कागज आधारित परीक्षा पद्धति के अनुरूप तैयारी कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि वह सभी पहलुओं पर विचार करेगी। उसने पक्षकारों से अपने जवाब तथा सुझाव दाखिल करने को कहा।
सरकार ने हलफनामे में कहा कि नीट परीक्षा को कलम-कागज आधारित प्रणाली से सीबीटी में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर, चाहे वह एक चरण में हो या जेईई की तर्ज पर दो चरणों में, संबंधित पक्ष सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं।
केंद्र ने कहा कि अंतिम निर्णय नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले कार्यबल की सिफारिशों पर विचार करने के बाद लिया जाएगा। केंद्र ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रणाली की खामियों को समाप्त करने के लिए व्यापक बदलाव किए गए हैं।
यह हलफनामा उच्चतम न्यायालय के 29 मई के उस आदेश के जवाब में दाखिल किया गया, जिसमें केंद्र सरकार से यह बताने को कहा गया था कि भविष्य में नीट परीक्षा किस प्रकार आयोजित की जाएगी और यह किस प्रकार सुरक्षित रहेगी।
केंद्र ने कहा कि एंटी पेपर लीक बिल के माध्यम से कानूनी ढांचे को मजबूत किया गया है। याचिकाओं में से एक में एनटीए के स्थान पर मजबूत और स्वायत्त संस्था गठित करने अथवा एजेंसी का पुनर्गठन करने का निर्देश देने की मांग की गई है।