Abhay Pratap Singh | March 23, 2026 | 04:49 PM IST | 1 min read
कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा कि स्कूल अभिभावकों पर संस्थान से ही किताबें और पोशाक खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों पर आर्थिक दबाव पड़ता है।

नई दिल्ली: निजी स्कूलों में हर साल फीस बढ़ाए जाने पर 23 मार्च को राज्यसभा में चिंता जताते हुए कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने इसके नियमन के लिए एक पारदर्शी नियामक बनाने की मांग की। शून्यकाल में पाटिल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि स्कूल हर साल शुल्क बढ़ा देते हैं और इसके अलावा विकास निधि, गतिविधि शुल्क, ट्यूशन फीस आदि भी लिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल अभिभावकों पर संस्थान से ही किताबें और पोशाक खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग के लोगों पर आर्थिक दबाव पड़ता है।
पाटिल ने मांग की कि सरकार को इसके नियमन के लिए एक पारदर्शी नियामक बनाना चाहिए, साथ ही स्कूलों का नियमित रूप से ऑडिट भी होना चाहिए। उन्होंने कहा “शिक्षा लग्जरी नहीं है बल्कि मौलिक अधिकार है।” कांग्रेस सांसद ने कहा कि पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के कार्यकाल में शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 पारित हुआ था और इसके तहत स्कूलों में 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा, ''यह देखना चाहिए कि कितने स्कूल इसका पालन कर रहे हैं।'' भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ब्रजलाल ने उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर मंडलों के हिंदू जुलाहा कोरी समुदाय के लोगों को अनुसूचित जाति प्रमाण जारी किये जाने की मांग की।
आगे कहा कि यह लोग लंबे समय से इस सुविधा से वंचित हैं। भाजपा के सेरिंग दोरजी लेप्चा, सीमा द्विवेदी, माया नारोलिया, नबाम रेबिया, सिकंदर कुमार, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, अखिलेश प्रसाद सिंह, मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति और आम आदमी पार्टी की स्वाति मालीवाल ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए।