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Scholarship: छात्रवृत्ति में देरी के लिए पीएसी 6 राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ लाएगी विशेषाधिकार प्रस्ताव

Abhay Pratap Singh | October 16, 2026 | 11:35 AM IST | 3 mins read

उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और बिहार के मुख्य सचिवों को एससी विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के वितरण में कई वर्षों की देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होना था।

विद्यार्थियों को मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति की बकाया राशि के लिए 48 महीने तक और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार करना पड़ा। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)
विद्यार्थियों को मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति की बकाया राशि के लिए 48 महीने तक और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार करना पड़ा। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने 15 अक्टूबर को फैसला किया कि अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के वितरण में देरी के मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित नहीं होने वाले 6 राज्यों के मुख्य सचिवों के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया जाएगा।

कुछ विद्यार्थियों को नहीं मिली कोई राशि -

उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और बिहार के मुख्य सचिवों को एससी विद्यार्थियों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के वितरण में कई वर्षों की देरी के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए समिति के समक्ष उपस्थित होना था। हालांकि, इनमें से कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। पीएसी के अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि समिति की लेखा परीक्षा में पाया गया कि विद्यार्थियों को मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति की बकाया राशि के लिए 48 महीने तक और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के लिए 89 महीने तक इंतजार करना पड़ा तथा कुछ विद्यार्थियों को कोई राशि ही नहीं मिली।

खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों के शीर्ष नौकरशाह तलब -

वेणुगोपाल ने एक्स पर छह “खराब प्रदर्शन करने वाले” राज्यों के शीर्ष नौकरशाहों को तलब किए जाने का कारण बताते हुए कहा, “आय और जाति संबंधी पात्रता का सत्यापन नहीं किया गया तथा भुगतान गैर-अनुसूचित जाति के लाभार्थियों तक पहुंच गया, जबकि पात्र बच्चे इंतजार करते रहे।” उन्होंने कहा, “समिति ने इसे अवमानना मानते हुए गंभीरता से लिया है और विशेषाधिकार नियमों के तहत कार्रवाई के लिए इसे माननीय अध्यक्ष के संज्ञान में लाया जाएगा।”

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दलित बच्चे के लिए छात्रवृत्ति उसकी कक्षा में पहुंच तय करती है -

वेणुगोपाल ने कहा, “एक दलित बच्चे के लिए छात्रवृत्ति यह तय करती है कि उसकी पहुंच कक्षा तक बनी रहेगी या नहीं। पीएसी सामाजिक न्याय की योजनाओं के क्रियान्वयन को संवैधानिक दायित्व मानती है और जब तक प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को उसका हक नहीं मिल जाता, तब तक वह प्रत्येक राज्य और मंत्रालय की जवाबदेही तय करेगी।” वेणुगोपाल ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वर्ष 2017 से 2022 के बीच की लेखा परीक्षा में मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति के वितरण में चार साल से अधिक और मैट्रिक-पश्चात छात्रवृत्ति के वितरण में करीब सात साल की देरी पाई गई उन्होंने कहा, “यह हम सभी के लिए चौंकाने वाला था।”

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कोई समन्वय नहीं -

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच कोई समन्वय नहीं था और राज्यों ने भी इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने कहा, “तीन महीने बीत जाने के बाद भी कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) नहीं दी गई है। यह एक गंभीर मुद्दा है।” पीएसी अध्यक्ष ने कहा कि समिति ने मुख्य सचिवों के उपस्थित नहीं होने को “गंभीरता से” लिया है और उनके खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार प्रस्ताव देने का सर्वसम्मति से फैसला किया है।

छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए -

उन्होंने कहा कि समिति इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने जा रही है। वेणुगोपाल ने कहा, “अधिकारी किसी भी योजना के क्रियान्वयन में इतनी देरी नहीं कर सकते।” उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “इसलिए पीएसी इसे बड़े स्तर पर उठाएगी और हम अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करने जा रहे हैं। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जानी चाहिए। हमने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय सचिव के साथ इस विषय पर विस्तार से चर्चा की है।”

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