Santosh Kumar | July 27, 2026 | 09:30 AM IST | 2 mins read
प्रधानमंत्री की यह घोषणा 36 दिनों तक चले उस आंदोलन के समाप्त होने के एक दिन बाद आई, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था। यह आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में सुधार के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की रविवार को घोषणा की। मोदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार कार्यबल के सुझावों को लागू करेगी, जिससे यह पक्का होगा कि परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद हो और प्रौद्योगिकी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करके उसमें पारदर्शिता लाई जा सके।
प्रधानमंत्री की यह घोषणा 36 दिनों तक चले उस आंदोलन के समाप्त होने के एक दिन बाद आई, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था। यह आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ।
कार्यबल के अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व निदेशक एस सोमनाथ, आसूचना ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि ''देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला होने पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।''
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों को आगे बढ़ाने के संबंध में सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया है।
प्रह्लाद जोशी ने रविवार शाम इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की। संसद में प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर कड़ी रोक लगाने संबंधी प्रस्तावित विधेयक के मद्देनजर इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, ''नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार त्रुटिरहित और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए कार्यबल के सुझावों पर काम करेगी।
उन्होंने कहा कि ''जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया'', उन्हें जेल भेज दिया गया है और सरकार सोमवार को संसद में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ़ कड़ा कानून लाने के लिए एक नया विधेयक पेश करने जा रही है।
पीएम ने कहा कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्यबल का गठन किया गया है। उन्होंने कहा, ''यह परीक्षा सुधारों पर केंद्रित होगा। जैसे ही हमें रिपोर्ट मिलेगी, हम परीक्षाओं को विश्वसनीय बनाने के लिए इसके सुझावों को लागू करेंगे।''
25 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए प्रधान ने कहा कि यह कदम युवाओं के हित में और शिक्षा व्यवस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शन ने इस फ़ैसले के लिए मजबूर किया।
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