NITI Aayog Report: स्कूलों में छठी कक्षा से ही रोजगारपरक कौशल पर हो ध्यान, नीति आयोग का सुझाव
Press Trust of India | August 20, 2026 | 08:14 PM IST | 2 mins read
रिपोर्ट में कहा गया, ''कक्षा 10 और 12 के बोर्ड विषय रूपरेखा में बदलाव कर व्यावसायिक विषयों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी राज्यों के बोर्ड को 10वीं के बोर्ड प्रमाणन के लिए इस संशोधित रूपरेखा को अपनाना चाहिए।''
नई दिल्ली: नीति आयोग ने रोजगार की काबिलियत बढ़ाने के लिए छठी कक्षा से ही रोजगार और उद्यमिता कौशल प्रशिक्षण और नौवीं कक्षा से छात्रों की रुचि और रोजगार की जरूरतों के अनुसार हुनरमंद बनाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रम शुरू करने की वकालत की है। आयोग ने कहा है कि कौशल विकास का काम शुरुआती स्तर से होना चाहिए और इसे स्कूल प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए
नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कौशल विकास की नई परिकल्पना' में कक्षा 11 और 12 के सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य रोजगार काबिलियत एवं उद्यमिता कौशल को एक अलग विषय के रूप में जारी रखने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया, ''कक्षा 10 और 12 के बोर्ड विषय रूपरेखा में बदलाव कर व्यावसायिक विषयों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी राज्यों के बोर्ड को 10वीं के बोर्ड प्रमाणन के लिए इस संशोधित रूपरेखा को अपनाना चाहिए।''
NITI Aayog Report: कक्षा 6 से कौशल प्रशिक्षण पर जोर
आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) में छठी कक्षा से व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार कौशल को शामिल करने का मार्गदर्शन दिया गया है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी सीमित है।
रिपोर्ट में कहा गया, ''कौशल विकास की शुरुआत जल्दी होनी चाहिए और इसे स्कूल प्रणाली में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में रोजगार क्षमता, विकल्पों और आगे बढ़ने के अवसरों को बेहतर बनाया जा सके।''
आयोग ने सुझाव दिया कि छठी से 12वीं कक्षा तक सभी विद्यार्थियों के लिए सामान्य रोजगार काबिलियत एवं उद्यमिता कौशल को अनिवार्य रूप से शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही 9वीं कक्षा से व्यवस्थित कौशल प्रशिक्षण शुरू किए जाएं।
इससे छात्र स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर की कौशल मांग के अनुसार विशेषज्ञता हासिल कर सकें। आयोग ने कहा कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में भी बदलाव की जरूरत है ताकि शिक्षा को श्रम बाजार की जरूरतों से जोड़ा जा सके।
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NITI Report: 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण
कई पाठ्यक्रम पुराने हैं और सामान्य डिग्रियों में अधिक नामांकन से रोजगार के अवसर सीमित हैं। इसे सुधारने के लिए पीपीपी मॉडल और प्रशिक्षण आधारित डिग्री-डिप्लोमा कार्यक्रमों के जरिए उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।
रिपोर्ट में सामान्य डिग्री की जगह उद्योगों की जरूरत के अनुसार व्यावहारिक और विशेषज्ञता वाले कोर्स शुरू करने का सुझाव दिया गया। साथ ही, काम के साथ प्रशिक्षण व कमाई के साथ पढ़ाई वाले डिग्री कार्यक्रम बढ़ाने की बात कही गई है।
वर्ष 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से कौशल विकास से जुड़े खर्च के लिए 34,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
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