Press Trust of India | May 1, 2025 | 10:17 AM IST | 2 mins read
पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) हेमंत प्रियदर्शी ने कहा कि नीट यूजी 2025 परीक्षा के पेपर लीक होने की झूठी खबर फैलाई जा रही है।
Predict your MBBS, BDS & AYUSH admission chances with the NEET College Predictor. Get personalized college recommendations based on rank, category & quota.
Try Now
नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली नीट-यूजी 2025 परीक्षा के पेपर लीक के नाम पर साइबर ठगी को लेकर राजस्थान पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। एनटीए और राजस्थान साइबर क्राइम ब्रांच ने छात्रों और अभिभावकों को उन जालसाजों से सावधान रहने की सलाह दी है जो नीट-यूजी का पेपर लीक होने का दावा कर उनसे पैसे ठगने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) हेमंत प्रियदर्शी ने कहा कि नीट यूजी 2025 परीक्षा के पेपर लीक होने की झूठी खबर फैलाई जा रही है। टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया के जरिए अभिभावकों से लाखों रुपये की ठगी की जा रही है।
अधिकारी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए नीट यूजी 2025 परीक्षा देशभर में 4 मई को होनी है। परीक्षा से पहले टेलीग्राम और सोशल मीडिया पर पेपर लीक से जुड़ी फर्जी खबरों के कारण छात्र और अभिभावक चिंतित हैं।
पुलिस ने कहा कि साइबर अपराधी पेपर लीक के नाम पर अभिभावकों से लाखों रुपए ठगने की कोशिश कर रहे हैं। वे फर्जी संदेश भेजकर छात्रों को फंसा रहे हैं कि पेपर प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ है या टॉप रैंकर्स और कोचिंग सेंटरों के जरिए उपलब्ध है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि नीट 2025 परीक्षा से पहले पेपर लीक के नाम पर टेलीग्राम पर फर्जी चैनल बनाए गए हैं। ऐसा ही एक चैनल "नीट पीजी लीक्ड मेटिरियलस" नाम से चल रहा था, जिसके करीब 20,600 सदस्य थे।
कुछ चैनल नीट पीजी 2024 लीक पेपर बेचने का झूठा दावा कर रहे हैं। घोटालेबाज छात्रों से 50-70 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं और पेपर लीक की गारंटी के लिए प्रिंटिंग प्रेस, रैंकर्स और कोचिंग सेंटर के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
एनटीए और साइबर क्राइम ब्रांच ने कहा है कि ये सभी दावे झूठे हैं। उन्होंने छात्रों को ऐसे चैनलों से सावधान रहने और किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट को पैसे न देने की सलाह दी है जो प्रश्नपत्र लीक करने का दावा कर रहे हैं।
साथ ही उन्होंने छात्रों को आगाह किया है कि वे अपना रोल नंबर, पासवर्ड या बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें। प्रियदर्शी ने कहा कि ऐसे फर्जी टेलीग्राम चैनल या ऐप की जानकारी एनटीए और साइबर क्राइम ब्रांच को दें।
उन्होंने कहा कि संदिग्ध स्क्रीनशॉट, ग्रुप लिंक, बैंक खाता, यूपीआई आईडी और वॉलेट विवरण की सूचना साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930, साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या नजदीकी पुलिस स्टेशन/साइबर पुलिस स्टेशन पर दें।