एनसीपीसीआर और मेटा ने परीक्षा के दबाव से निपटने में छात्रों की मदद के लिए राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत की
Abhay Pratap Singh | February 7, 2024 | 08:40 PM IST | 1 min read
परीक्षा के समय बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा। नई दिल्ली में मेटा और एनसीपीसीआर संयुक्त रूप से एक सम्मेलन भी आयोजित करेगा।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) और मेटा ने सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर परीक्षा से पहले तनाव से छुटकारा पाने में छात्रों की मदद के लिए 'अखिल भारतीय कार्यक्रम' की शुरुआत की है। बताया गया कि परीक्षा में अच्छे प्रदर्शन के दबाव से छात्रों में चिंता, अवसाद और अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि परीक्षा बच्चों के लिए तनावपूर्ण समय हो सकता है। जब वे अपनी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो अक्सर माता-पिता, साथियों के दबाव का सामना करना पड़ता है।
प्रियंक ने आगे बताया कि प्रधानमंत्री के 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के अनुसार एनसीपीसीआर परीक्षापर्व का छठा संस्करण मना रहा है। परीक्षा के तनाव के प्रति बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के दृष्टिकोण को बदलना और परीक्षा के दौरान उनकी चिंता को दूर करना है।
फेसबुक इंडिया (मेटा) प्रमुख नताशा जोग ने कहा कि हमें एहसास है कि छात्र परीक्षा के दौरान दबाव और तनाव से गुजरते हैं, उनकी सहायता के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। छात्रों की सुरक्षा और उनकी मदद करना मेटा के लिए प्राथमिकता है।
नताशा ने आगे कहा कि हम बच्चों में परीक्षा के तनाव को उजागर करने के लिए एनसीपीसीआर के साथ साझेदारी करने पर उत्साहित हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को तनाव ट्रिगर करने वालों की पहचान करने व उन्हें संबोधित करने में मदद करना है और जब चीजें भारी लगती हैं तो ब्रेक लेना है।
एनसीपीसीआर और मेटा का संयुक्त कार्यक्रम बच्चों के बीच परीक्षा तनाव में परीक्षापर्व के मौजूदा प्रयासों का पूरक है। परीक्षा के समय बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा, जिसका 12 फरवरी को लाइव प्रसारण किया जाएगा। वहीं, नई दिल्ली में मेटा और एनसीपीसीआर संयुक्त रूप से एक सम्मेलन भी आयोजित करेगा।
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