Press Trust of India | August 28, 2025 | 03:47 PM IST | 1 min read
डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव (डीटीआई) ने कहा कि वह अन्य शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर इस आदेश को वापस लेने के लिए अपना अभियान तेज करेगा।
नई दिल्ली: डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव (डीटीआई) ने शिक्षा मंत्रालय के 2017 के उस निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग की है जिसमें एमफिल/पीएचडी वेतन वृद्धि को समाप्त करने का आह्वान किया गया था। समूह द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डीटीआई नेताओं ने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा 20 अगस्त को प्राचार्यों को इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने की दी गई सलाह को शिक्षकों को गुमराह करने के लिए एक "दिखावा" और "नौटंकी" करार दिया।
बैठक को जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत मजूमदार, डूटा के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर नंदिता नारायण, प्रोफेसर धीरज नाइट, जामिया मिलिया इस्लामिया के डॉ देबदित्य भट्टाचार्य और डीयू की डॉ उमा गुप्ता ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय मंत्रालय के ‘‘अवैध निर्देश’’ और उसके बाद यूजीसी के स्पष्टीकरण के खिलाफ एकजुट है। 1 जनवरी, 2016 को या उसके बाद सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त संकाय सदस्य, जिन्हें एमफिल या पीएचडी डिग्री के लिए अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान की गई थी, अब उन्हें वापस लिए जाने का खतरा है। शिक्षक संगठन के अनुसार, कई शिक्षकों को लाखों रुपये की वसूली के नोटिस भेजे गए हैं, जिसे शिक्षक समूहों ने ‘‘जबरन वसूली’’ बताया है।
डीटीआई नेताओं ने यह भी बताया कि यह मामला मार्च 2025 में यूजीसी अध्यक्ष द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति द्वारा समीक्षाधीन है, और समीक्षा पूरी होने से पहले कोई भी वसूली प्रक्रिया ‘‘मनमानी और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है।’’
उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के आदेश केवल नए वेतन वृद्धि को मंजूरी देने पर रोक लगाते हैं, पहले से दी गई वेतन वृद्धि को वापस लेने पर नहीं। डीटीआई ने कहा कि वह अन्य शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर इस आदेश को वापस लेने के लिए अपना अभियान तेज करेगा।