Santosh Kumar | August 6, 2026 | 05:21 PM IST | 1 min read
पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक लोकसभा में पेश किया।

नई दिल्ली: विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र स्व-शासी संस्थान बनाने के प्रावधान वाले 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' से संबंधित संसद की संयुक्त समिति का कार्यकाल शीतकालीन सत्र तक बढ़ा दिया गया। समिति की अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी की सांसद डी. पुरंदेश्वरी ने लोकसभा में यह प्रस्ताव रखते हुए कहा, ''विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 से संबंधित संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के समय को शीतकालीन सत्र 2026 के अंतिम सप्ताह तक बढ़ाया जाए।''
सदन ने ध्वनिमत से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। पिछले साल शीतकालीन सत्र के दौरान तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह विधेयक लोकसभा में पेश किया। सरकार ने इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजने पर सहमति जताई थी।
विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को सशक्त बनाना है ताकि वे अनुसंधान व नवाचार में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें। यह प्रावधान केंद्र या राज्य के द्वारा स्थापित या संचालित विश्वविद्यालयों पर भी लागू होंगे।
'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पेश किए जाते समय कई विपक्षी सदस्यों ने इसके हिंदी नाम को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह विधेयक हिंदी थोपने की कोशिश है।
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16 जुलाई को समिति ने कहा था कि विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक से व्यापक नियामक शक्तियां एक ही केंद्रीय नियामक के पास केंद्रित हो सकती हैं जिससे उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका है।
मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि वीबीएसए विधेयक, 2025 में प्रस्तावित दंड का मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। विधेयक में यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई की जगह एक एकीकृत उच्च शिक्षा नियामक बनाने का प्रस्ताव है।