Santosh Kumar | July 8, 2025 | 10:15 PM IST | 1 min read
जेएनयूएसयू अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से अपील की कि वे छात्रों के साथ एकजुटता से खड़े हों और कम से कम एक दिन के लिए उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ ने मंगलवार (8 जुलाई) को विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों को एक पत्र जारी कर उन छात्रों के लिए सक्रिय समर्थन मांगा है जो अपनी मांगों को लेकर पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों की प्राथमिक मांग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (जेएनयूईई) को फिर से बहाल करना है, जिसे हाल के वर्षों में यूजीसी नेट आधारित प्रवेश प्रणाली द्वारा बदल दिया गया है।
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से अपील की कि वे अपने छात्रों के साथ एकजुटता से खड़े हों और कम से कम एक दिन के लिए उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हों।
पत्र में दावा किया गया, ‘‘यूजीसी नेट आधारित मॉडल जेएनयू की विशिष्ट शैक्षणिक संस्कृति की अनदेखी करता है और इसने जेएनयूईई द्वारा हाशिए पर पड़े और विविध पृष्ठभूमि के छात्रों को दी जाने वाली पहुंच को कमजोर कर दिया है।’’
छात्र प्रवेश परीक्षा को बहाल करने की मांग के अलावा ‘पीएचडी’ शोधार्थी को बेदखल करने की प्रक्रिया को समाप्त करने, ‘प्रॉक्टोरियल’ जांच को रद्द करने और ‘मेरिट-कम-मीन्स’ छात्रवृत्ति में वृद्धि की भी मांग कर रहे हैं।
अध्यक्ष नीतीश कुमार और सदस्य समेत 5 छात्र 12 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। बता दें कि जेएनयूएसयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार को सोमवार (7 जुलाई) रात सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
इनपुट-पीटीआई
इसका उद्घाटन कुलपति प्रो. मजहर आसिफ और रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद मेहताब आलम रिजवी ने अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में किया। जेएमआई ने इस बार प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अब तक 80% से अधिक परिणाम घोषित कर दिए हैं, जिससे वह अन्य संस्थानों से आगे निकल गया है।
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