एससी आरक्षण में वर्गीकरण लागू करने का हरियाणा सरकार का फैसला दलितों को बांटने का षड़यंत्र है - मायावती
Abhay Pratap Singh | October 18, 2024 | 06:40 PM IST | 2 mins read
हरियाणा सीएम नायब सैनी ने कहा - हरियाणा, सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय को ‘‘आज ही’’ लागू कर देगा, जिसमें आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर वर्गीकरण करने का राज्यों को अधिकार दिया गया है।
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने हरियाणा राज्य में अनुसूचित जाति आरक्षण में वर्गीकरण लागू करने को लेकर हरियाणा की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार का यह फैसला दलितों को बांटने और आपस में लड़ाते रहने का षड़यंत्र है।
यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा, “हरियाणा की नई भाजपा सरकार द्वारा एससी समाज के आरक्षण में वर्गीकरण को लागू करने अर्थात आरक्षण कोटे के भीतर कोटा की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला दलितों को फिर से बांटने व उन्हें आपस में ही लड़ाते रहने का षड़यंत्र। यह दलित विरोधी ही नहीं बल्कि घोर आरक्षण विरोधी निर्णय है।”
बसपा अध्यक्ष ने आगे कहा, “हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोकने के लिए भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के आगे नहीं आने से भी यह साबित है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी भी आरक्षण को पहले निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनाने और अन्ततः इसे समाप्त करने के षडयंत्र में लगी है, जो घोर अनुचित व बीएसपी इसकी घोर विरोधी है।”
बता दें कि, हरियाणा सीएम नायब सैनी ने आज यानी 18 अक्टूबर को अपने मंत्रिमंडल की पहली बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान संवाददाता सम्मेलन में सीएम सैनी ने कहा कि, हरियाणा, सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय को ‘‘आज ही’’ लागू कर देगा, जिसमें आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों (SC) के भीतर वर्गीकरण करने का राज्यों को अधिकार दिया गया है।
सीएम सैनी के इस बयान के बाद मायावती ने कहा, “वास्तव में जातिवादी पार्टियों द्वारा एससी-एसटी व ओबीसी समाज में ’फूट डालो-राज करो’ व इनके आरक्षण विरोधी षड़यंत्र आदि के विरुद्ध संघर्ष का ही नाम बीएसपी है। इन वर्गों को संगठित व एकजुट करके उन्हें शासक वर्ग बनाने का हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा।”
वहीं, एक यूजर ने हरियाणा में एससी आरक्षण वर्गीकरण पर ‘एक्स’ पर लिखा, ‘हरियाणा विधानसभा चुनाव खत्म होते ही भाजपा अपने असलियत बांटो और राज करो पर उतर आई है। चुनाव के समय जब पार्टियों को सबक सिखाने का समय रहता है तो हमारा समाज सब कुछ भूलकर आरक्षण विरोधी पार्टियों को वोट दे देता है।’
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