रोजगार के बिना वृद्धि ‘यूपीए’ सरकार की कहानी थी, वर्तमान सरकार की नहीं - बजट चर्चा पर वित्त मंत्री सीतारमण
Press Trust of India | February 13, 2026 | 09:27 AM IST | 5 mins read
वित्त मंत्री ने कहा, अर्थव्यवस्था अब केवल कुछ गिने-चुने वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें भागीदारी बढ़ी है।
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश मजबूत वृद्धि के साथ निम्न बेरोजगारी दर के रास्ते पर है। उन्होंने कहा कि रोजगार के बिना वृद्धि (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) यूपीए सरकार की कहानी थी, वर्तमान सरकार की नहीं। सीतारमण ने राज्यसभा में 2026-27 के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है, उसे दबाया नहीं जा रहा। व्यक्तिगत आयकर का संग्रह का कॉरपोरेट कर से अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि मध्यम वर्ग पर बोझ डाला जा रहा है।
सीतारमण ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना अर्थव्यस्था को मृत बताने वाले उनके बयान को नकारात्मक करार देते हुए कहा कि वह देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं, जो वास्तव में भारत के वृद्धि में अपना योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि बजट में उठाए गए कदम एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए सरकार के संकल्प को बताते हैं।
केंद्र सरकार की राशि कोई 'मुफ्त भंडार' नहीं -
कल्याणकारी योजनाओं के लिए राशि में कटौती को लेकर विपक्ष की आलोचना पर सीतारमण ने कहा कि केंद्र सरकार की राशि कोई 'मुफ्त भंडार' नहीं है जिसका मनमाने ढंग से उपयोग किया जा सके, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक का मेहनत से कमाया हुआ योगदान है, जिसे बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राशि तभी जारी की जाती है जब इसकी आवश्यकता होती है, न कि खर्च बढ़ाने के लिए। मंत्री ने कहा, ''सरकारी खर्च प्रक्रिया में अब पूर्ण पारदर्शिता है।''
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि भारत में मुद्रास्फीति कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। उन्होंने कहा, ''मैं इस तथ्य रखना चाहती हूं कि वृद्धि दर उच्च होने के बावजूद मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है। आज भारत में महंगाई का कोई संकट नहीं है। स्थिरता और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के कारण मुद्रास्फीति को काबू में लाया गया गया है।''
रोजगार के बिना वृद्धि संप्रग (यूपीए) सरकार की कहानी थी -
सीतारमण ने कहा, ''रोजगार के बिना वृद्धि संप्रग सरकार की कहानी थी, वर्तमान सरकार की नहीं।'' विपक्ष के इस आरोप पर कि मध्यम वर्ग अधिक कर दे रहा है, सीतारमण ने कहा, ''यह निष्कर्ष निकालना कि व्यक्तिगत कर संग्रह कॉरपोरेट करों से अधिक होने के कारण मध्यम वर्ग हाशिए पर धकेला जा रहा है, यह स्थिति का पूरी तरह से गलत विश्लेषण है। मध्यम वर्ग को दबाये जाने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने कहा, ''...वास्तव में, पिछले दस साल में किए गए आर्थिक सुधारों के कारण ऐतिहासिक रूप से मध्यम वर्ग का विस्तार हुआ है। इसके पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।'' सीतारमण ने कहा कि आज कर योग्य आय वाले लोगों की संख्या अधिक है। अब संगठित क्षेत्र में अधिक आय दिखाई देती है।
अर्थव्यवस्था अब कुछ गिने-चुने वर्ग तक सीमित नहीं है -
वित्त मंत्री ने कहा, "अर्थव्यवस्था अब केवल कुछ गिने-चुने वर्ग तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें भागीदारी बढ़ी है। मध्यम वर्ग का दायरा बढ़ रहा है। 2013-14 और 2024-25 के बीच, करदाताओं की संख्या, यानी रिटर्न दाखिल करने वाले या टीडीएस कटवाने वालों की संख्या, 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई है।''
पिछले 11 वर्षों में, करदाताओं की संख्या दोगुनी हो गई है। यह संचयी रूप से सालाना 7.9 प्रतिशत की वृद्धि है। वित्त मंत्री ने कहा, ''यह इस देश में मध्यम वर्ग का सबसे बड़ा संरचनात्मक विस्तार है। इसलिए, अगर कर का दायरा बढ़ रहा है तो दबाव नहीं हो सकता...। लोग कर देने के लिए आगे आ रहे हैं और वे इसलिए आगे नहीं आ रहे हैं क्योंकि हम दरें बढ़ा रहे हैं।''
आयकर सीमा बढ़ाई गई -
उन्होंने कहा कि इस विस्तार के बावजूद, आयकर सीमा सभी के लिए 12 लाख रुपये और वेतनभोगी वर्ग के लिए 12.75 लाख रुपये तक बढ़ायी गई है। सीतारमण ने कहा, ''अगर 12.75 लाख रुपये कमाने वाले वेतनभोगी वर्ग को कर नहीं देना पड़ता, तो फिर दबाने वाली बात कहां है? दूसरा, मानक कटौती भी बढ़ाई गई है। नई कर व्यवस्था ने कर रिटर्न भरने और जांच-पड़ताल को सरल बना दिया है।''
इसके अलावा, अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने से भी घरेलू खर्च कम हुए हैं। जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने से वस्तुओं के दाम कम होने के कारण लोगों के मासिक खर्च कम हो रहे हैं। सीतारमण ने कहा, ''महंगाई भी ऐतिहासिक रूप से कम है। इसलिए, बढ़ती वास्तविक आय और रिकॉर्ड कम मुद्रास्फीति के साथ यह नहीं कहा जा सकता है कि मध्यम वर्ग दबाव में है। दोनों चीजें साथ नहीं चल सकती...।''
कल्याणकारी योजनाओं में व्यय कटौती के आरोपों का खंडन -
कई कल्याणकारी योजनाओं में व्यय कटौती के विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी योजना के लिए राज्यों को कोष आवंटन में कोई कमी नहीं है। उन्होंने सरकारी योजनाओं पर व्यय की तुलना करते कहा कि पिछले 10 साल में 14 सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये ही बिना खर्च के रहे, जबकि संप्रग शासन के दौरान यह राशि 94,000 करोड़ रुपये थी। सीतारमण ने आवंटन के बिना योजनाओं की घोषणा करने के विपक्ष के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने इस संदर्भ में पिछले संप्रग सरकार के दौरान के कई उदाहरण दिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बढ़ते कर्ज पर 'मगरमच्छ के आंसू' बहा रही है। वास्तविकता यह है कि सरकार अत्यधिक कर्ज नहीं ले रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे 48 लाख करोड़ रुपये से अधिक भेजे हैं और लीकेज यानी चोरी को रोककर 4.31 लाख करोड़ रुपये की बचत की है। सीतारमण ने कहा कि बजट अतीत को नहीं भूलता। नाजुक स्थिति, दहाई अंक में मुद्रास्फीति को याद रखता है। वहीं आज भारत में मुद्रास्फीति का कोई संकट नहीं है। इसे काबू में कर लिया गया है।
शिक्षा से रोजगार और उद्यम -
वित्त मंत्री ने कहा कि देश एक ऐसे दुर्लभ संयोग से गुजर रहा है, जब उसने 'वृहद आर्थिक संतुलन' हासिल किया है। यह एक अनूठी उपलब्धि है। उन्होंने कहा, ''यह पूरे देश की उपलब्धि है। यानी, जीडीपी की वृद्धि दर अच्छी और ऊंची है तथा मुद्रास्फीति कम है, जो लगातार इसी स्तर पर बनी हुई है।'' सीतारमण ने कहा कि सरकार ने 2026-27 के बजट में 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' स्थायी समिति का गठन करने का प्रस्ताव किया है ताकि युवाओं को सेवा क्षेत्र के लिए तैयार किया जा सके।
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