Bagless Day: शिक्षा निदेशालय ने '10 बैगलेस डेज' के लिए जारी किए दिशानिर्देश, तनाव मुक्त शिक्षा पर जोर
'10 बैगलेस डेज' के लिए ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा एनईपी 2020 की सिफारिशों के तहत तैयार किए गए हैं।
Press Trust of India | October 23, 2024 | 09:35 AM IST
नई दिल्ली: शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार (22 अक्टूबर) को दिल्ली के सरकारी और निजी स्कूलों में 10 'बैगलेस डे' लागू करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। एक सर्कुलर में शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को कक्षा छह से आठ तक के छात्रों के लिए स्कूलों में 10 'बैगलेस डे' लागू करने का निर्देश दिया।
शिक्षा निदेशालय द्वारा इन निर्धारित दिनों में बच्चों को बगैर बस्ता के स्कूल आना होगा। परिपत्र में कहा गया है कि ये दिशा-निर्देश राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिश के अनुसार निर्धारित किए गए हैं।
Bagless Day: तनाव मुक्त शिक्षा पर जोर
शिक्षा निदेशालय ने निर्देश दिया है कि इन दिनों बच्चों को बिना स्कूल बैग के स्कूल आना होगा। परिपत्र में कहा गया है कि ये दिशा-निर्देश एनसीईआरटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) की सिफारिशों के तहत तैयार किए हैं।
इसका उद्देश्य स्कूल में पढ़ाई को छात्रों के लिए मजेदार और तनाव-मुक्त अनुभव बनाना है। इसमें कहा गया है कि गतिविधियों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए ताकि स्कूल के संसाधनों का पूरा उपयोग किया जा सके।
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इन गतिविधियों में शामिल होंगे छात्र
दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि 'हैप्पीनेस' पाठ्यक्रम या स्कूल भ्रमण के दौरान बच्चों के बिना बस्ते वाले दिनों में इन गतिविधियों को शामिल किया जा सकता है। छात्र ऐतिहासिक स्मारक, सांस्कृतिक स्थल, शिल्प केंद्र और पर्यटन स्थलों पर जा सकते हैं।
इसके साथ ही वे विभिन्न अवधारणाओं और परंपराओं के बारे में जानकारी लेने और विरासत को संरक्षित करने के महत्व को समझने के लिए कलाकारों तथा शिल्पकारों से मिल सकते हैं।’’ बता दें कि शिक्षा मंत्रालय ने बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए साल में '10 बैगलेस डेज' का सुझाव दिया है।
ये सुझाव कक्षा 6-8 तक के विद्यार्थियों के लिए हैं। इन 10 दिनों में विद्यार्थी स्कूल से बाहर की गतिविधियों में शामिल होंगे। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर जाने, स्थानीय कलाकारों से मिलने और आस-पास के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाने का सुझाव दिया गया है।
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