Saurabh Pandey | October 1, 2026 | 01:34 PM IST | 4 mins read
नई दिल्ली में करियर्स360 द्वारा इंडिया रिसर्च इंपैक्ट समिट का आयोजन किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं की भूमिका और उच्च शिक्षा की चुनौतियों पर मंथन चल रहा है। इसके साथ ही 54 वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं को सम्मानित भी किया जाएगा।

नई दिल्ली : नई दिल्ली में 'करियर्स360' द्वारा 'इंडिया रिसर्च एंड इम्पैक्ट समिट' (IRIS) 2026 का आयोजन किया गया है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा में रिसर्च के सामने आ रही चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श करना था। इस कार्यक्रम की थीम 'यूनिवर्सिटीज एडवांसिंग नॉलेज, यूनिवर्सिटीज क्रिएटिंग नॉलेज' रखा गया है।
इस कार्यक्रम में देश भर के नीति निर्माता, विश्वविद्यालयों के प्रमुख, शोधकर्ता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि अलग-अलग सत्रों में शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में कुल छह पैनल चर्चाएं, पुरस्कार समारोह और एक विशेष चर्चा शामिल होगी।
पहला पैनल (11 बजे - 11:50 बजे तक) - पहली पैनल चर्चा भारतीय शोध को क्या रोक रहा है: फंडिंग, फैकल्टी, संस्थान या प्रोत्साहन?" विषय पर केंद्रित था, जिसमें अशोका यूनिवर्सिटी के संस्थापक प्रमथ राज सिन्हा, सांसद भारत मथुकुमिल्ली, शिव नादर यूनिवर्सिटी की कुलपति डॉ. अनन्या मुखर्जी, बिट्स पिलानी के वाइस चांसलर प्रो. वी. रामगोपाल राव, आईसीटी मुंबई के प्रोफेसर एमेरिटस पद्मश्री जी.डी. यादव और अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. पंकज चंद्रा ने अपने विचार रखे।
दूसरा पैनल (11:50 बजे-12:40 बजे तक) - उद्योग और शिक्षा जगत के बीच शोध साझेदारी: सहयोग की कमी या विश्वास का संकट? विषय पर आयोजित इस सत्र में अशोका यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. ऋषिकेश टी. कृष्णन, एमिटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अतुल चौहान, श्री सिटी के संस्थापक सी. श्रीनिवास राजू, इंफो एज के एमडी व सीईओ हितेश ओबेरॉय और फिजिक्स वाला (PW) के सह-संस्थापक प्रतीक माहेश्वरी शामिल हुए।
तीसरा पैनल (12:40 बजे - 1:30 बजे तक) - लैब से कानून तक: नीति, व्यवसाय और सामाजिक प्रभाव पर शोध का आंकलन कैसे हो?" पर आधारित सत्र में ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सी. राज कुमार, आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक प्रो. भारत भास्कर, फ्लेम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दिशान कामदार, वीआईटी के उपाध्यक्ष डॉ. सेकर विश्वनाथन और आईएफएचई हैदराबाद के कुलपति डॉ. ए. विनय कुमार ने चर्चा की।
चौथा पैनल (दोपहर 2:30 बजे - 3:20 बजे तक) - क्या भारतीय विश्वविद्यालय शोध के वास्तविक प्रभाव को पुरस्कृत कर रहे हैं या केवल आउटपुट को?" इस विषय पर प्लाक्ष यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. रुद्र प्रताप, जेएसएस यूनिवर्सिटी के प्रो-चांसलर डॉ. बी. सुरेश, एसआरएम यूनिवर्सिटी एपी के कुलपति प्रो. सीएच. सतीश कुमार, वीजीयू जयपुर के सीईओ ई. ओकार बगारिया और आईएमआई के सीईओ डॉ. सुरेश रामनाथम अपने विचार साझा करेंगे।
पांचवां पैनल (दोपहर 3:20 बजे - 4:10 बजे तक) - युवा शोधकर्ता: पीएचडी छात्र और रिसर्च फेलो भारत के शोध माहौल को कैसे देखते हैं? इस विषय पर ट्रिपल आईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. संदीप कुमार शुक्ला, एल्सेवियर के उपाध्यक्ष डॉ. संदीप संचेती, करियर लॉन्चर की अध्यक्ष सुजाता क्षीरसागर, गलगोटियास यूनिवर्सिटी के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया और बीआईएम त्रिची के निदेशक डॉ. असित के. बर्मा अपने अनुभव साझा करेंगे।
छठा और अंतिम पैनल (शाम 4:10 बजे से 5 बजे तक) - शोध और रैंकिंग: रैंकिंग ढांचे में शोध मानकों का आंकलन कितना निष्पक्ष है? इस विषय पर आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो. मनोज कुमार तिवारी, डिजी के संस्थापक हेमंत सहल, अमृता विश्वविद्यापीठम के रजिस्ट्रार डॉ. बिपिन नायर, इंडिया रिसर्च वॉच के संस्थापक अचल अग्रवाल और एलायंस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. बी. प्रीयस्टली शान मंथन करेंगे। इसके साथ ही पैनल चर्चा का सत्र समाप्त हो जाएगा।
समिट के तहत 'थर्ड फैकल्टी रिसर्च अवॉर्ड्स' समारोह का आयोजन शाम 5 बजे किया जाएगा। इस समारोह में 'करियर्स360' द्वारा 27 विभिन्न विषय क्षेत्रों के 54 उत्कृष्ट शोधकर्ताओं (सरकारी और निजी संस्थानों से एक-एक) को सम्मानित किया जाएगा। इन पुरस्कारों को पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री (शिक्षा एवं वाणिज्य) तथा 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक' की संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्ष और सांसद डॉ. डी. पुरंदेश्वरी द्वारा प्रदान किया जाएगा।
पुरस्कार वितरण के बाद, शाम 6:30 बजे "सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस: बिल्डिंग रिसर्च स्ट्रेंथ दैट मैटर्स" विषय पर एक विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। इस सत्र में यूनिवर्सिटी एट बफेलो (न्यूयॉर्क) के प्रेसिडेंट एमेरिटस सतीश के. त्रिपाठी और एसआरएम यूनिवर्सिटी एपी के कुलपति प्रो. सीएच. सतीश कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे और शोध शक्ति को मजबूत करने पर अपने विचार साझा करेंगे।
करियर्स360 के संस्थापक और अध्यक्ष महेश्वर पेरी ने अपने संदेश में कहा कि यूनिवर्सिटी केवल बना-बनाया ज्ञान पढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि नया ज्ञान (रिसर्च) पैदा करने के लिए होती है। अब तक रैंकिंग और साख के चक्कर में संस्थानों का नाम तो हुआ, लेकिन शोध करने वाले व्यक्ति की पहचान छिप गई। IRIS की शुरुआत इसीलिए की गई है ताकि क्रेडिट संस्थान को ही नहीं, बल्कि असली मेहनत करने वाले शोधकर्ता को मिले। इसी सोच को बदलते हुए IRIS के मंच से 27 विभिन्न विषयों के 54 उत्कृष्ट शोधकर्ताओं (सरकारी और निजी संस्थानों से एक-एक) को सम्मानित करने का फैसला लिया गया ताकि उन्हें चर्चा के केंद्र में लाया जा सके।