Press Trust of India | October 30, 2026 | 08:55 AM IST | 3 mins read
न्यायालय के निर्देश पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए। ये नियम राज्य सरकार के विभागों के अलावा उसके अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र और पिछले रिकॉर्ड के सत्यापन संबंधी नियम सख्त कर दिए हैं जिसके तहत हिंसक तरीके से 'समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलने' का उद्देश्य रखने वाले संगठनों के सदस्यों को राज्य की सरकारी नौकरियों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत हत्या, दुष्कर्म, आतंकवादी गतिविधियों, भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक करने और संगठित सॉल्वर गिरोह संचालित जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान किया गया है।
न्यायालय के निर्देश पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए। ये नियम राज्य सरकार के विभागों के अलावा उसके अधीन निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और शहरी तथा ग्रामीण स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे।
आदेश के मुताबिक, ''ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं जिसका संकल्प और उद्देश्य हिंसक तरीके से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, वे सरकार के अधीन नियुक्ति के लिये अपात्र समझे जाएंगे।''
आदेश में कहा गया है कि किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा का समर्थक होना अपने आप में अयोग्यता का आधार नहीं होगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक आदेश के तहत नए नियमों में अपराधों की विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।
इनमें राज्य के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या का प्रयास, दहेज हत्या, यौन अपराध, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने, अपहरण, मानव तस्करी, लूट, डकैती, संगठित अपराध, आतंकवादी गतिविधियों और भीड़ द्वारा हिंसा जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
आदेश के अनुसार परीक्षा एवं चयन प्रक्रिया में अनुचित साधनों, फर्जी प्रमाणपत्रों, प्रश्नपत्र लीक और सॉल्वर गिरोह से जुड़े मामलों को भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। गंभीर अपराधों में आरोप तय होना ही अयोग्यता का आधार होगा।
आदेश में कहा गया कि 21 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन की डेट से पिछले 3 वर्षों के दौरान हिंसक गतिविधियों में शामिल रहने वाले अभ्यर्थी के मामले में उसकी सक्रिय संलिप्तता की आशंका पर विचार किया जा सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा चरित्र सत्यापन नहीं कराया जाएगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभागों से सेवा संबंधी अभिलेख मंगाए जा सकेंगे।
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विभाग के अनुसार, संबंधित प्रावधान को राजनीतिक विचारधारा, वैचारिक असहमति या शांतिपूर्ण विरोध के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित करने की व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
विभाग ने कहा कि नियम में राजनीतिक विचारधारा और हिंसात्मक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। इसमें ऐसे संगठनों का उल्लेख है, जिनका उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है।
ऐसे संगठनों से जुड़ाव और संबंधित गतिविधियों के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। विभाग के मुताबिक, चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित यह प्रावधान पहले से लागू था।
उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में नए शासनादेश में इसे अन्य संबंधित प्रावधानों के साथ संकलित कर अधिक सरल और स्पष्ट बनाया गया है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा, ''ये एक कायर सरकार के नियम हैं।''
उन्होंने कहा कि सपा सत्ता परिवर्तन का समर्थन केवल लोकतांत्रिक तरीकों, खासकर चुनाव के जरिए ही करती है, और सत्ता बदलने के किसी अन्य तरीके का समर्थन नहीं करती।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि युवा आंदोलनों को हिंसक बताने की भाजपा की कोशिशों का न केवल यूपी के युवाओं की ओर से बल्कि पूरे देश के युवाओं की ओर से कड़ा जवाब मिलेगा।